हमें एआई को परिपक्व बनाकर इसका भरपूर इस्तेमाल करना है : डॉ. अनामिका चव्हाण
‘एआई और हिंदी भाषा के भविष्य की नई दिशा’ विषय पर ऑनलाइन गूगल मीट का आयोजन
भोपाल। कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई आने वाले भविष्य में हिंदी को नई दिशा देने में सहायक होगा। हमें इससे बचना नहीं है, क्योंकि आने वाला कल इसका ही होगा। हमें इसे सिखाकर अपने लिए अधिक उपयोगी बनाना है और इसे अधिक जानकारियों से परिपूर्ण बनाना है। यह उद्गार डॉ. राजेंद्र बी. पाटिल, निदेशक, उमा कृष्ण मैनेजमेंट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, मुंबई के हैं। वे लघुकथा शोध केंद्र समिति, भोपाल द्वारा आयोजित राजभाषा पखवाड़े के ‘निज भाषा उन्नति अहै’ के ग्यारहवें सत्र के ऑनलाइन गूगल मीट आयोजन में मुख्य अतिथि वक्ता के रूप में ‘एआई और हिंदी भाषा के भविष्य की नई दिशा’ विषय पर बोल रहे थे। आयोजन में स्वागत उद्बोधन अश्विनी देशपांडे, दिल्ली ने दिया। संचालन डॉ. ममता माली, मुंबई एवं चित्रा राघव राणा, यूएसए ने किया।
इस आयोजन में ‘हिंदी, एआई और नई पीढ़ी में हिंदी सीखने-सिखाने के नए तरीके’ विषय पर बोलते हुए दूसरी वक्ता डॉ. अनामिका चव्हाण, संज्ञानात्मक शास्त्रज्ञ एवं प्रशिक्षक, मुंबई ने कहा कि एआई हमारे हृदय और हमारी संवेदना को भले स्पर्श न करे, हमें इससे मित्रता करना ही पड़ेगी। हिंदी को वैश्विक रूप से समृद्ध करने में एआई सहायक होगा। हमें एआई को परिपक्व बनाकर इसका भरपूर इस्तेमाल करना है।कार्यक्रम के अंत में केंद्र की ओर से डॉ. शबनम सुल्ताना ने सभी का आभार प्रकट किया। आयोजन में उपस्थित सभी लोगों ने रुचिपूर्वक सक्रिय भागीदारी की एवं नई जानकारियों से लाभान्वित हुए।


0 टिप्पणियाँ