म.प्र. साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा नारदमुनि पुरस्कार से अलंकृत

पटकथा का मूल आधार बताओ नहीं दिखाओ - डॉ. रविंद्र कात्यायन

पटकथा का मूल आधार बताओ नहीं दिखाओ - डॉ. रविंद्र कात्यायन

भोपाल। साहित्य से अधिक सिनेमा ने हिंदी को लोकप्रिय बनाया, हिंदी भाषा के पाठ्यक्रम को लेकर विदेशों में उदासीनता ने हिंदी का बड़ा नुकसान किया है जो लोग विदेशों में रहते हैं वे हिंदी सीखना चाहते हैं परन्तु भारत में अपनी भाषा के प्रति उदासीनता का भाव बड़ा दुखद है।' यह उदगार हैं वरिष्ठ साहित्यकार तेजेंद्र शर्मा, इंग्लैंड संपादक - पुरवाई के जो लघुकथा शोध केंद्र समिति भोपाल द्वारा 'निज भाषा उन्नति अहै' के अंतर्गत आयोजित राजभाषा पखवाड़े के ग्यारहवें सत्र में 'फिल्म रेडियो और रंगमंच की भाषा' विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। 

कार्यक्रम के आरम्भ में केंद्र की ओर से मुजफ्फर इकबाल सिद्दीकी ने स्वागत उद्बोधन दिया। डॉ.ममता माली मुंबई एवं चित्रा राघव राणा यू एस ए के कुशल संचालन में गोष्ठी आरम्भ हुई, इसमें दूसरे वक्ता डॉ.रविन्द्र कात्यायन मुंबई वरिष्ठ साहित्यकार ने 'कथा से पटकथा' विषय पर बोलते हुए कथा से पटकथा लेखन प्रक्रिया पर अपनी बात रखते हुए कहा कि कथा जहां पाठक को बताती है वहीं पटकथा दर्शक को दिखाती है, यानी बताओ नहीं दिखाओ इसका मूल आधार है पटकथा में कथा ही नहीं दृश्य कैमरा संगीत, ध्वनियाँ, मौन आदि की मुख्य भूमिका होती है।' कार्यक्रम के अंत में लघुकथा शोध केंद्र समिति भोपाल की निदेशक श्रीमती कांता रॉय ने उपस्थित जनों को आभार प्रकट किया, इस आयोजन में देश दुनिया के अनेक हिंदी साहित्य प्रेमी उपस्थित थे। 

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