म.प्र. साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा नारदमुनि पुरस्कार से अलंकृत

आपले वाचनालय और हिंआंप की साहित्य गोष्ठी में बरसी सावन की फुहारे और गूंजे आजादी के जयकारे

आपले वाचनालय और हिंआंप की साहित्य गोष्ठी में बरसी सावन की फुहारे और गूंजे आजादी के जयकारे

इंदौर । सावन की मनभावन फुहारों , देशभक्ति के जयकारों से लेकर व्यक्ति, समाज , परिवार के सरोकारों के विविध साहित्यिक , सांगीतिक विधाओं के रंग से सराबोर रहा आपले वाचनालय और हिंदी आंदोलन परिवार , पुणे के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित साहित्यिक कार्यक्रम ।

इस साहित्यिक समागम में सर्वश्री डॉ. कृष्ण कुलश्रेष्ठ , वि .ग.सातपुते , प्रो. महेंद्र ठाकुरदास , भानूप्रकाश शर्मा , डॉ . विपिन पवार , संदीप राशिनकर , वेदस्मृति कृति , ऋता सिंह , नरेंद्र कौर छाबडा, डॉ . कांतिदेवी लोधी , डॉ.ज्योतिकृष्ण , अरविंद तिवारी , चित्रा उप्पल , श्रीति राशिनकर ने जहां अपनी शाब्दिक विद्याओं की सतरंगी प्रस्तुति से अभिभूत किया वहीं आशु गुप्ता की देशभक्ति की रचना की सुरमई प्रस्तुति ने श्रोताओं को भाव विभोर किया ।डॉ.अरुणा पाठक ने अपनी प्रस्तुति में क्रांतिकारी टंट्या भील के स्वाधीनता संग्राम के योगदान को याद किया । सावन में शिव आराधन और स्मरण की महत्ता को देखते हुए सुधा भारद्वाज ने अपनी केदारनाथ यात्रा का सजीव संस्मरण प्रस्तुत कर श्रोताओं को भाव विभोर किया । सुशील कुमार तिवारी , बाबासाहेब लोधी , मिश्रा , विनय पाठक , श्रीमती सिंह ने भी रचनात्मक सहभागिता की ।

स्वतंत्रता दिवस के पखवाड़े में आयोजित इस गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे मेजर सरजूप्रसाद ' गयाजीवाले ' , अतिथिद्वय सत्येंद्र सिंह और डॉ . रजनी रणपिसे ने भी अपनी प्रभावी रचनाओं से गोष्ठी को ऊंचाई दी । कार्यक्रम का सुचारू और रोचक संचालन किया वरिष्ठ लेखक और चिंतक संजय भारद्वाज ने । स्वागत का दायित्व निभाया शौर्य , मेघना और श्रेयस राशिनकर ने।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ