अनुगूँज काव्य संग्रह लोकार्पित
भोपाल। तुलसी साहित्य अकादमी द्वारा सृजन श्रृंखला - 59 के अंतर्गत श्रीमती नितिन शर्मा नीति की पुस्तक अनुगूँज का लोकार्पण एवं विमर्श हुआ।
डा.मोहन तिवारी आनंद ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कार्यक्रम के उत्कृष्ट संयोजन, गंभीरता पूर्वक पुस्तक समीक्षा तथा अतिथियों के उद्गारों की सराहन करते हुए कृतिकार के सृजन कौशल की सराहना करते हुए कहा कि आजकल इतनी सारगर्भित रचनाओं का सृजन देखने में कम ही आ रहा है। श्रीमती शर्मा के उत्तम और सफल प्रयास के लिए बधाई देते हुए कहा कि अभी तो ये शुरुआत है अभी तो आपको बहुत उत्तम लेखन करते हुए साहित्य में अपने नाम और काम की अमिट रेखा खींचनी है। मुख्य अतिथि डा.विजय तिवारी किसलय ने लोकार्पित कृति की रचनाओं की सराहना करते हुए विदुषी लेखिका की कलम से निशृत रचनाओं की प्रसंशा करते हुए कहा कि हर रचना का शब्द संयोजन उत्कृष्ट है तथा रस, छंद, अलंकार तथा मुहावरों के प्रयोग ने रचनाओं में रोचकता भरी है।
कार्यक्रम संयोजक सुरेश पटवा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हिंदी साहित्य का इतिहास काशी प्रचारिणी सभा की स्थापना से होता है। फिर प्रयाग से होता हुआ जबलपुर पहुंचता है। आज जबलपुर की साहित्यिक जमात को यहाँ पाकर और उनके उद्बोधन सुन दुष्यंत संग्रहालय धन्य हो गया। उन्होंने रचनाधर्मिता की महत्ता पर प्रकाश डाला कि रचनाकार के दृष्टिकोण में आदर्श समाज की एक कल्पना है। साहित्यकार उसे साकार होते देखना चाहता है। इस प्रक्रिया में वह घुटन से मुक्त होता है। सारस्वत अतिथि डॉ. विकास दवे निदेशक मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में कार्यक्रम के सफल आयोजन तथा कृति अनुगूँज की रचनाओं को उत्कृष्ट रचनाओं सुन्दर गुलदस्ता निरूपित किया।
श्रीमती नितिन शर्मा नीति ने अपनी पुस्तक की 85 रचनाओं के सृजन एवं लेखन प्रक्रिया पर अपना मंतव्य व्यक्त कर लोकार्पित कृति में से चुनिंदा रचनाओं का पाठ किया । राजेश पाठक महासचिव पाथेय संस्था जबलपुर ने अनुगूँज की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने कृति की रचनाओं के रचना विधान शब्द संयोजन तथा प्रयुक्त भाषा शैली की सराहना करते हुए लेखिका के रचना कौशल की सराहना में स्पष्ट कहा कि बहुत दिनों बाद एक उत्कृष्ट काव्य संग्रह हम सभी के बीच में आया है। कार्यक्रम का सफल संचालन अखिल भारतीय कला मंदिर भोपाल के सचिव वीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने किया।


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