म.प्र. साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा नारदमुनि पुरस्कार से अलंकृत

ज़हीर कुरेशी के व्यक्तित्व की गहराई समुन्द्र जैसी- संतोष चौबे

ज़हीर कुरेशी के व्यक्तित्व की गहराई समुन्द्र जैसी- संतोष चौबे

भोपाल। वरिष्ठ ग़ज़लकार ज़हीर कुरेशी की पाँचवी पुण्यतिथि की पूर्व संध्या पर साहित्यिक संस्था ओपन बुक्स ऑनलाइन की भोपाल इकाई ने उनको स्मरण करते हुए, कल रविवार को भोपाल के गौतम नगर स्थित होटल ब्लिस रेजीडेंसी में एक कार्यक्रम "हिन्दी ग़ज़ल के बहाने-ज़हीर कुरेशी" आयोजित किया। सर्वप्रथम माँ शारदे एवं ज़हीर कुरेशी के तस्वीर पर अतिथियों द्वारा माल्यार्पण किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार संतोष चौबे, ने ज़हीर कुरेशी से साथ अपने बहुत पुराने संबंध को याद किया एवं हिन्दी ग़ज़ल की यात्रा में अमीर खुसरो, कबीर, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के साथ निराला आदि को याद किया। उन्होंने कहा कि ज़हीर कुरेशी की ग़ज़लों और साहित्य में समुन्द्र और नदी का बहुत उल्लेख हुआ है जिससे यह सिद्ध होता है कि ज़हीर का व्यक्तित्व समुन्द्र जैसा गहरा है। 


विशिष्ट अतिथि अंतरराष्ट्रीय शायरा अंजुम रहबर ने ज़हीर कुरेशी को याद करते हुए कहा कि ग़ज़ल के क्षेत्र सर्वोच्च स्थान रखते हुए भी उनका सादगी से भरा व्यवहार सबका प्रिय बनाता है। श्रोताओं की माँग पर उन्होंने अपनी दो ग़ज़लें भी सुनाई एवं सारस्वत अतिथि ज़हीर कुरेशी के सुपुत्र समीर कुरेशी अपने पिता के बारे में बोलते हुए भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि कैसे उनके पिता नियम को सर्वाधिक महत्व देते हुए उनकी परवरिश किये। विशेष अतिथि दुष्यंत कुमार के सुपुत्र आलोक त्यागी ने ज़हीर कुरेशी की ग़ज़ल यात्रा को याद किया और कार्यक्रम के संयोजक और ज़हीर कुरेशी के शिष्य मनीष बादल की प्रशंसा करते हुए कहा कि मनीष ने ग़ज़ल के क्षेत्र में गुरु शिष्य परंपरा को वापस से ज़िन्दा किया है।

संस्था के अध्यक्ष अशोक निर्मल ने सभी मंचाधीन अतिथियों को मोमेंटो से स्वागत किया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में बताया कि ज़हीर कुरेशी ने दुष्यंत कुमार के बाद हिन्दी ग़ज़ल का परचम मजबूती से ऊँचा रखा और आज उनकी ग़ज़लों पर देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में छात्र शोध कर रहे हैं एवं उनकी ग़ज़लें अनेक विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल रही हैं। शहर के चुनिंदा वरिष्ठ साहित्यकारों महेश सक्सेना, डॉ किशन तिवारी, ममता वाजपेयी, दिनेश प्रभात, प्रेमचंद गुप्ता, कमलेश नूर, प्रियेश गुप्ता आदि द्वारा अपनी और ज़हीर कुरेशी की ग़ज़लों का पाठ किया गया। कार्यक्रम आयोजक मनीष बादल ने बताया कि ज़हीर कुरेशी की याद में प्रतिवर्ष यह आयोजन किया जायेगा। कार्यक्रम का संचालन युवा ग़ज़लकार बलराम धाकड़ द्वारा किया गया, स्वागत वक्तव्य डॉ. महेश मनुज ने दिया एवं धन्यवाद ज्ञापन मनीष बादल ने दिया।

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