म.प्र. साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा नारदमुनि पुरस्कार से अलंकृत

39 वां भेराजी सम्मान समारोह आयोजित

39 वां भेराजी सम्मान समारोह आयोजित
भेराजी ने अपना सम्पूर्ण जीवन, तन मन धन सर्वस्व लोक संस्कृति को समर्पित कर दिया – डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा

उज्जैन। भेराजी सम्मान लोक संस्कृति का महत्वपूर्ण मंगल प्रसंग है। ऐसी महान विभूति के स्मरण का जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन, तन मन धन सर्वस्व लोक संस्कृति को समर्पित कर दिया। भेराजी ने अपने लोक गायन और संस्कृति से आकाशवाणी को लोकवाणी बना दिया। भेराजी की आकाशवाणी की यात्रा को देखना भारत के सांस्कृतिक - सामाजिक इतिहास को देखना है। उन्होंने यह सिद्ध किया कि लोक के बिंदु से जीवन के महासिंधु के दर्शन किए जा सकते हैं। एक अग्रणी लोक संचारक के रूप में उनकी भूमिका अविस्मरणीय है। उन्होंने लोक की वाचिक परंपरा और आधुनिक प्रसारण के बीच की खाई को पाट दिया था। जिनके पास लोक से संवाद करने की सामर्थ्य है, उन सभी महापुरुषों ने लोकभाषा का आश्रय लिया। भेराजी गुरु गोरखनाथ, कबीर, तुलसीदास की परंपरा के लोक साधक थे।


ये विचार मालवा लोक कला एवं संस्कृति संस्थान द्वारा कालिदास अकादमी में आयोजित 39वें भेराजी सम्मान समारोह में अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में सम्राट् विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलानुशासक प्रो. शैलेन्द्रकुमार शर्मा ने व्यक्त किये। सारस्वत अतिथि डॉ. पद्मजा रघुवंशी ने कहा कि भेराजी ने कला जगत को बहुत कुछ दिया है और भेराजी सम्मान संस्कृति और कला साधकों का सम्मान है। मुख्य अतिथि सिने जगत के निर्माता निर्देशक अनिल दुबे मुम्बई ने कहा कि भेरा जी का आकाशवाणी का खेती गृहस्थी कार्यक्रम कृषि और मालवी भाषा के उन्नयन का आयोजन था। प्रेमचंद सृजन पीठ के निदेशक श्री मुकेश जोशी विशेष अतिथि थे।


सम्मान प्रसंग के अंतर्गत ख्यात लोक गायिका और लोकसंस्कृति विद डॉ. अनुराधा शर्मा एवं प्रतिष्ठित लोक गायिका श्रीमती गीता पराग को भेराजी सम्मान से अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। सम्मान पत्र का वाचन डॉ. पिलकेंद्र अरोरा और डॉ. गरिमा दवे ने किया। अतिथियों ने शाल, श्रीफल, सम्मान पत्र और स्मृति चिन्ह अर्पित कर डॉ. अनुराधा शर्मा और श्रीमती गीता पराग को सम्मानित किया। स्वागत भाषण संस्था के संरक्षक वरिष्ठ साहित्यकार श्री श्रीराम दवे ने दिया।


सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत नोलाई कला मंच बड़नगर के लोकगायक योगेन्द्र वर्मा के निर्देशन में शिवशंकर वर्मा, राधेश्याम वर्मा, दशरथ वर्मा, जालम प विजय सोनी, रामप्रसाद गहलोत, ओमप्रकाश चौहान, राखी वर्मा, प्रियंका वर्मा, युवराज वर्मा, प्रियांशु वर्मा, लोकेश परमार एवं दल ने श्रीगणेश वंदना, कानग्वालिया नृत्य की भव्य प्रस्तुतियां दीं। नृत्य कलाकार ऐश्वर्या शर्मा ने कथक शैली में आकर्षक गणेश वंदना प्रस्तुत की।


प्रारम्भ में अतिथियों ने भेराजी, समारोह के संस्थापक श्री कैलाश वर्मा एवं श्रीमती सुमन वर्मा के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित की। अतिथियों का स्वागत मालवा लोक कला एवं संस्कृति संस्थान के अध्यक्ष डॉ. हरीशकुमार सिंह, संरक्षक श्रीराम दवे, सचिव श्री जयेश कैलाश भेराजी, कमलेश वर्मा, देवेन्द्र वर्मा, श्रीमती रानी जयेश भेरा जी, सीमा देवेन्द्र, तृप्ति दवे, अजय नागर, रमेश चन्द्र नायक, अंजू वर्मा,प्रशांत द्रोनावत, मोनिका वर्मा, तृप्ति दवे, आदि ने किया। समारोह में शिशिर उपाध्याय, प्रेमसिंह यादव, नर्मदा सोनी डोलेकर, सन्ध्या पगारे, संदीप सृजन ,राजेश रावल ,अनिल कुरेल, सुभाष पाठक,शेलेश लेले, शशांक दुबे, अनिल कुरेल, प्रकाश देशमुख,शारदा श्री, प्रवीण जोशी, योगेश यादव, आदि उपस्थित थे। संचालन डॉ. हरीशकुमार सिंह ने किया। आभार प्रदर्शन जयेश कैलाश भेराजी ने किया।

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