दिल्ली में सम्पन्न हुआ व्यंग्य यात्रा का भव्य सम्मान समारोह
शब्दाभिव्यक्ति को समृद्ध बनाती है साहित्य केंद्रित कला - संदीप राशिनकर
इंदौर । किसी भी साहित्यिक विधा में निहित अभिव्यक्ति के सामर्थ्य को उसके साथ प्रकाशित कला ना सिर्फ समृद्ध करती है वरन् शब्द निहित अर्थों को भिन्न दृष्टि और वृहद आकार देती है। यह विचार शहर के चर्चित चित्रकार संदीप राशिनकर ने दिल्ली के हिन्दी भवन में आयोजित महत्वपूर्ण व्यंग्य यात्रा के भव्य सम्मान समारोह में हुए अपने सम्मान के अवसर पर अपने उद्बोधन में व्यक्त किए ।
उन्हें यहां व्यंग्य यात्रा शब्दान्वेषी कला भूषण सम्मान से सारस्वत अतिथि लीलाधर मंडलोई, अशोक त्यागी और अध्यक्ष प्रेम जनमेजय द्वारा सम्मानित किया गया । सम्मान निधि, स्मृति चिन्ह, सम्मान पत्र स्वरूप के इस सम्मान के प्रत्युत्तर में आपने कहा कि शब्दों का अन्वेषण कर कलात्मक अर्थवत्ता के साथ साहित्य के प्रभाव को बहुगुणित करती साहित्य केंद्रित कलाओं का साहित्यिक पुरस्कारों में समावेश किया जाना , कला की साहित्यिक महत्ता को रेखांकित किया जाना आवश्यक ही नहीं अनिवार्य भी है। उन्होंने प्रेम जनमेजय एवं सम्मान समिति का इस पहल के लिए आभार माना। इस अवसर पर सर्वश्री विष्णु नागर, विनोद कुमार विक्की, हरीश पाठक, डॉ . संजीव कुमार, बी. एल.आच्छा और स्नेहलता पाठक को रवीन्द्रनाथ त्यागी, धर्मवीर भारती स्मृति विविध व्यंग्य यात्रा सम्मानों से सम्मानित किया गया।
सर्वश्री विष्णु नागर, समकालीन भारतीय साहित्य के संपादक बलराम, गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कुमार प्रशांत, एनबीटी के निदेशक लालित्य ललित, अशोक गुप्ता, व्यंग्य चित्रकार माधव जोशी, टेक महिंद्रा की ग्लोबल हेड श्रीया, पंकज सक्सेना जैसे अनेक लब्ध प्रतिष्ठित व्यक्तियों की उपस्थिति में यह समारोह संपन्न हुआ। कार्यक्रम का सुचारू संचालन नीरज मिश्र और सम्मान समिति के संयोजक रणविजय राव ने किया। स्वागत सुश्री आशा कुंद्रा, सोनी लक्ष्मी राव ने किया और आभार माना अशोक त्यागी ने ।


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