कलम जब भी उठाओ साथी मन में हिंदुस्तान रहे - प. व्यास
उज्जैन। जूते फटे पहन लो साथी दिल में स्वाभिमान रहे, कलम जब भी उठाओ साथी मन में हिंदुस्तान रहे। ऐसी ही कई विचारोत्तेजक पंक्तियों से भारत माता की आरती के रचयिता देवकृष्ण व्यास ने प्रेमचंद सृजन पीठ द्वारा राष्ट्रकवि श्रीयुत श्रीकृष्ण सरल को समर्पित काव्य अनुष्ठान में शिखर कलश स्थापित करते हुए सरल जी एवं प्रेमचंद जी पर सार्थक रचनाएं सुनाते हुए कहा कि सरल जी को आज अकादमियां पीठे याद कर रही हैं जबकि उनके जीते जी तत्कालीन सत्ताओं ने उनकी उपेक्षा ही की यदि इस दौर में वे होते तो तो वे पद्म सम्मानित हो जाते।
कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य अतिथि सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने कहा कि कविता और कवियों ने सदैव जनता के मानस को परिवर्तित किया है चाहे आजादी का समय हो या वर्तमान का, कविता ने जागरण के काम ही किए हैं उन्होंने इस सारस्वत अनुष्ठान के लिए कवि वृंद को शुभकामनाएं दीं। खरगोन से आए वरिष्ठ गीतकार श्री दर्द शुजालपुरी ने रश्मियां जिसके चेहरे पर केसर मलें जिसमें घर घर भगतसिंह जैसे बेटे पलें वंदनम वंदनम है भुवन भारती जैसे गीत सुनाकर श्रोताओं को आंदोलित कर दिया। वरिष्ठ व्यंग्य कवि मप्र लेखक संघ के अध्यक्ष डॉ राजेंद्र गट्टानी जी ने अपनी ऐसी व्यंग्य पंक्तियों से श्रोताओं को झकझोरा -उसने गर्म जोशी से हाथ मिलायाऔर मेरी आस्तीन को घूरने लगा शायद, रहने की जगह तलाश रहा था। वरिष्ठ कवि श्री अशोक भाटी ने भारत भूमि की शान में ये पंक्तियां इस धरती को रोज रात चांद निहारे, दक्षिण में चरण इसके सागर पखारे, राम कृष्ण की भूमि चलो इसको घूमे, सुबह सूरज जिसके मस्तक को चूमे, सुनाई। कवि पत्रकार श्री नरेन्द्र सिंह अकेला ने अपने कई मुक्तकों से बेटियों के हक में आवाज उठाते हुए कहा -मुसीबत बाप पर आई तो बेटे चल दिए घर से, तोड़कर गुल्लक बेटी ने वो राशि बाप को दे दी।
प्रयागराज से आए गीतकार शैलेंद्र मधुर ने अपने सुमधुर कंठ से सरस गीतों की सस्वर प्रस्तुति दी इसी तरह ललितपुर उप्र से आई सुश्री मंजू कटारे ने अपने आध्यात्मिक गीतों से वातावरण को राममय कर दिया।खातेगांव के प.मुकेश मासूम ने प्रारंभ में अपनी हास्य क्षणिकाओं और प्रतिगीतों से उपस्थित समुदाय को गुदगुदाया। संपूर्ण आयोजन के सूत्रधार हास्य कवि श्री दिनेश दिग्गज कवियों को अपनी हास्य रचनाओं शायरियों के साथ साथ गंभीर मुक्तकों से प्रस्तुत करते रहे। सरस्वती वन्दना सुश्री नेहा दुबे ने प्रस्तुत की। अध्यक्षता करते हुए रतजगे से लौटे लेकिन सभी कवियों को तन्मयता से सुनते हुए सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय कार्यपरिषद के वरिष्ठ सदस्य श्री राजेशसिंह कुशवाह ने श्रीयुत श्रीकृष्ण सरल जी के स्मरण के लिए प्रेमचंद सृजन पीठ को साधुवाद देते हुए मंच से मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जी को जन्मदिन पर शुभकामनाएं प्रेषित की। उन्होंने देवकृष्ण व्यास जी, दर्द शुजालपुरी जी सहित सभी कवियों द्वारा प्रस्तुत रचनाओं की भरपूर सराहना की।
सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की शलाका दीर्घा में संपन्न इस सारस्वत अनुष्ठान में नगर के साहित्यकार सुधीजन मप्र लेखक संघ के अध्यक्ष आचार्य डॉ हरिमोहन बुधौलिया, विक्रमादित्य शोध पीठ के कार्यकारी निदेशक डॉ रमण सोलंकी, डॉ श्रीकृष्ण जोशी ,वरिष्ठ व्यंग्यकार डॉ पिलकेंद्र अरोरा,प्राची के अध्यक्ष व्यंग्यकार शशांक दुबे, डॉ शेखर मैदमवार,जैन कवि संगम के अध्यक्ष सुगनचंद जैन, हास्य कवि सुरेन्द्र सर्किट, डॉ स्वामीनाथ पाण्डेय, डॉ मोहन बैरागी, संस्कार भारती के संजय शर्मा, प.प्रबोध पंड्या, वीडी बैंक उपाध्यक्ष राकेश वनवट, केशव पंड्या, डॉ उर्मि शर्मा, डॉ पुष्पा चौरसिया, डॉ प्रीति जोशी, डॉ हेमलता ओझा, डॉ नेत्रा रावणकर, संयोगिता जोशी, सरल काव्यांजलि के श्री संतोष सुपेकर, सीमा देवेन्द्र, संगीता तल्लेरा,डॉ अभिलाषा शर्मा , अनिल पांचाल सेवक,डॉ रफीक नागौरी, प्रफुल्ल शुक्ल ,विक्रम विवेक,कुमार संभव, अभिषेक निगम, दिनेश अनल, श्यामसिंह सिकरवार, महेश त्रिवेदी, अखिलेश द्विवेदी, मानसिंह शरद, जी के निगम, श्री मंडलोई, अक्षय चौरे सहित कई गणमान्यजन उपस्थित रहे। प्रारंभ में अतिथियों एवं सम्मानित कवियों का स्वागत प्रेमचंद सृजन पीठ के निदेशक मुकेश जोशी ने किया एवं समापन पर कार्यक्रम का समीक्षात्मक आभार कुलानुशासक आचार्य डॉ शैलेन्द्रकुमार शर्मा ने व्यक्त किया।



0 टिप्पणियाँ