म.प्र. साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा नारदमुनि पुरस्कार से अलंकृत

तुझे नाटक नहीं आता करेगा क्या ज़माने में -राजेन्द्र गट्टानी


तुझे नाटक नहीं आता करेगा क्या ज़माने में -राजेन्द्र गट्टानी
कवियों का दायित्व बहुत बड़ा है - डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा

उज्जैन। कविता अंधेरे और प्रकाश के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करती है। कवियों का दायित्व बहुत बड़ा है। कविता साझा अनुभवों में अपनी शक्ति पाती है। ये विचार मध्यप्रदेश लेखक संघ उज्जैन की प्रेस क्लब में आयोजित सरस काव्य गोष्ठी में विशिष्ट अतिथि सम्राट् विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलानुशासक एवं समालोचक प्रो. शैलेंद्रकुमार शर्मा ने व्यक्त किये। 


आपने कहा कि कविता मानव अस्तित्व के हर पहलू को पकड़ती है। वह दैनन्दिन खुशियों और संघर्षों से लेकर जीवन के गहरे सत्य तक सभी को उद्घाटित करती है। सरस गोष्ठी के मुख्यअतिथि मध्यप्रदेश लेखक संघ के प्रदेशाध्यक्ष राजेन्द्र गट्टानी ने कहा कि साहित्यिक ,सांस्कृतिक नगरी में आना और काव्य पाठ करना मन को सुकून देता है, आपने कविता पढ़ते हुए कहा कि - कभी चाहा नहीं फिर भी यह आता है बताने में/बहुत चीज ज़हमतें हैं आज अच्छापन निभाने में /मुझे स्कूल में नाटक से यह कहकर निकाला था /तुझे नाटक नहीं आता करेगा क्या ज़माने में ।


अध्यक्षीय उद्बोधन प्रो. हरिमोहन बुधौलिया ने दिया, सारस्वत अतिथि डॉ. शिव चौरसिया, विशिष्ट अतिथि श्रीकृष्ण जोशी और विशेष अतिथि प्रेमचंद सृजन पीठ के निदेशक मुकेश जोशी थे। सरस्वती वंदना डॉ. अनामिका सोनी ने प्रस्तुत कीी। स्वागत भाषण डॉ. हरीशकुमार सिंह ने दिया। सरस गोष्ठी में कैलाश सोनी सार्थक, डॉ. उर्मि शर्मा, डॉ. पुष्पा चौरसिया, संगीता तल्लेरा, डॉ. राजेश रावल सुशील, डॉ. रमेश चांगेसिया प्रभात, सुगनचंद जैन, संतोष सुपेकर, सीमा देवेन्द्र, डॉ. पांखुरी वक्त, संदीप सृजन, इंजीनियर प्रफुल्ल शुक्ला, डॉ. अनामिका अप्रतिम, सूरज नागर, डी.के. जैन, डॉ. अखिलेश चौरे, आशीष श्रीवास्तव अश्क, डॉ. अभिलाषा शर्मा, डॉ. हरीशकुमार सिंह, हरदीप दायले, नेत्रा रावणकर, श्रीकृष्ण गुप्ता, विनोद काबरा, मानसिंह शरद ने काव्य पाठ किया। 


इस अवसर पर मध्यप्रदेश लेखक संघ के प्रदेशाध्यक्ष श्री राजेंद्र गट्टानी का विशेष अभिनंदन प्रो. हरिमोहन बुधौलिया और मध्यप्रदेश लेखक संघ उज्जैन द्वारा किया गया। संचालन डॉ. राजेश रावल सुशील ने किया और आभार आशीष श्रीवास्तव ने व्यक्त किया।

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