मध्यप्रदेश लेखक संघ द्वारा प्रादेशिक राष्ट्र भक्ति, वीर रस गोष्ठी का आयोजन
आज़ादी की लड़ाई में हज़ारों शहीद ऐसे जिनका इतिहास में उल्लेख नहीं -चौ. मदन मोहन समर
भोपाल। मध्यप्रदेश लेखक संघ द्वारा प्रादेशिक राष्ट्र भक्ति, वीर रस गोष्ठी का आयोजन गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय, शिवाजी नगर, भोपाल में, वरिष्ठ कवियों चौ. मदन मोहन समर के मुख्य आतिथ्य, श्री जीवन एस. रजक के सारस्वत आतिथ्य, डॉ रामवल्लभ आचार्य, संरक्षक मध्यप्रदेश लेखक संघ के विशिष्ट आतिथ्य एवं राजेंद्र गट्टानी, अध्यक्ष मध्यप्रदेश लेखक संघ की अध्यक्षता में संपन्न हुई।
गोष्ठी में प्रदेश के चर्चित ओज और वीर रस के साहित्यकारों ने अपनी रचनाएँ सुनाई। पहले कवि के तौर पर चन्देरी से पधारे परम लाल परम ने सुनाया" देश में भाईचारा सबसे अच्छा है, जान सके ना हिन्दू मुस्लिम किसका बच्चा है"। विजयपुर से पधारे शेखर वत्स ने पढ़ा, " प्रेम सदा पराजित हो ऐसा कोई दस्तूर नहीं "। दतिया से आये मनीराम शर्मा ने वीर सपूत चंद्रशेखर आज़ाद को याद करते हुए सुनाया, "आज़ादी पाने की ख़ातिर, आज़ाद ने बीड़ा उठा लिया ” गुना से आये कवि सुनील शर्मा, चीनी ने सुनाया, "जग में जिसकी एक निराली शान है, ऐसा प्यारा भारत देश महान है"। स्थानीय कवि कमल सिंह ने सुनाया, "हम वीर बड़े मतवाले है, भारत माँ के रखवाले हैं, जब आन-बान पर आ जाये, हम देश पर मिटने वाले हैं। गुना से आये शंकर राव मोरे विद्यार्थी, ने सुनाया, "सेना से अस्तित्व हमारा, सैनिक अपनी शान हैं। स्थानीय कवयित्री रश्मि मिश्रा की रचनाओं से बहुत प्रभावित किया, "लहू से सींच कर वीरों चमन तुमने खिलाया है, तुम्हारे शौर्य के दम पर वतन ये मुस्कुराया है"।
खण्डवाँ के तारकेश्वर चौरे ने सुनाया, झंडा तिरंगा लहराता है अपनी पूरी शान से, मिली आज़ादी हमें वीरों के वीरों के बलिदान से"। भोपाल से कर्नल डॉ. गिरिजेश सक्सेना की रचना को बहुत वाहवाही मिली, "लातों के भूत न माने बातों से, अब कोई बात मत करना"। स्थानीय वरिष्ठ कवि छन्दकार डॉ. अशोक कुमार धमेनिया ने सुनाया, चीन को भी चिन्ह चुके, इतना विचार लो"। भोपाल के वरिष्ठ कवि डॉ. मोहन तिवारी आनंद ने सुनाया, "गुनगुनाना चाहता हूँ, गीत उनकी शान के, देश पर जो मर मिटे हैं, वीर हिन्दुस्तान के"। डॉ. प्रार्थना पंडित के इस गीत को बहुत सराहना मिली, "आज बड़ा बेगाना लागे, जिस आँगन में खेला हूँ, सरहद से है चिट्ठी आयी, माँ मैं बहुत अकेला हूँ"। प्रांतीय सचिव मनीष बादल ने देश भक्ति दोहे सुनाये, "वसुधा पारस से भरी, जल में जिसके क्षीर। वो भारत बस प्रेम दे, कभी न देता पीर"।।
संस्था के उपाध्यक्ष अनिरुद्ध सेंगर ने सुनाया, "अपने प्रण से कर्म कहानी लिख दी है, तुफानों के नाम जवानी लिख दी है"। संस्था के उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ गीतकार ऋषि शृंगारी ने सुनाया कि "हमारी जान तुम्हारी जान, हमारा प्यारा हिन्दुस्तान"। संस्था के संरक्षक एवं विशिष्ट अतिथि डॉ राम वल्लभ आचार्य ने सुनाया, "जो सबको राह दिखलाये उसे आदर्श कहते हैं।" कार्यक्रम के सारस्वत अतिथि, जीवन एस. रजक ने सुनाया, "बार बार गजनी आया, सोमनाथ तक लूट मचाया, नित नूतन पथ बढ़ता जाता, प्यारा हिंदुस्तान हमारा"। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवि चौ. मदन मोहन समर ने सुनाया, " तुमने कहा पथ पे बहुत काँटे मिलेंगे हमने कहा पथ पे बहुत फूल खिलेंगे"। अध्यक्षक्षीय उद्बोधन में संस्था के अध्यक्ष राजेंद्र गट्टानी ने अपने वक्तव्य रखे एवं रचना सुनाया, "लिखना है तो युवा वर्ग को, है आराम हराम लिखूँ"। धन्यवाद ज्ञापन ऋषि शृंगारी ने दिया एवं कार्यक्रम का सफल संचालन मनीष बादल एवं प्रार्थना पंडित ने किया।





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