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अंतर्मन में बज रहे अनुपम से मृदंग (कविता) -डॉ सुरेन्द्र मीणा


सुरभि मय स्पर्श, संयम भाव के मीत
सृजन आराधन मय,नित सृजन नव गीत

चित्त धर भाव प्रिय,असंख्य स्मरण प्रसंग
अंतर्मन में बज रहे, जीवन अनुपम मृदंग

कर्ण प्रिय भाव प्रवाह, अनवरत पुण्य सलिल
कोकिल राग संग, चातक - चकोर नवनील

बृह्मकमल सह्रदय सौंदर्य, नयन शिख श्रृंगार
ईश वृन्द, नव चंद नैसर्गिक सम्पूर्ण अभिसार

सृष्टि सार, सम व्यवहार संग सामीप्य बात
सानिध्य मय तम हरण, संग पूनम रात

-डॉ सुरेन्द्र मीणा, नागदा

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