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खादी को हमें अपने निकट लाना होगा


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह कहना है कि, खादी विकसित तथा आत्मनिर्भर भारत के सपनों को, सच में परिवर्तित करने के लिए, प्रेरणा का माध्यम बन सकती है। खादी उत्सव के पुनीत अवसर पर, उनके द्वारा बोला गया, यह कथन कि, खादी का धागा, स्वतंत्रता संग्राम के लिए, प्रेरणा का स्त्रोत बन गया और लोगों ने गुलामी की जंजीरों को तोड़ दिया। उसी तर्ज़ पर, खादी का यही धागा, भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को पूरा करने तथा आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की दिशा में, प्रेरणा बन सकता है। ज्ञातव्य है कि, उक्त खादी उत्सव का आयोजन, केंद्र सरकार द्वारा आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत किया गया था। इस दौरान मोदी ने, एक साथ 7500 महिलाओं के साथ होकर, खादी चरखा चलाकर, उनका सहयोग भी किया।

वाकई, स्वाधीनता संग्राम के समय में, महात्मा गांधी ने, अपने संघर्षों से, खादी को आत्म सम्मान का प्रतीक बना दिया था। इसी कारण स्वाधीनता संग्राम के संघर्ष के आंदोलनों के दौरान , स्थान-स्थान पर खादी भंडारों का खुलना तथा स्वाधीनता कार्यकर्ताओं द्वारा लोगों को, खादी वस्त्र धारण करने की सलाह देने जैसे सदकार्य भी, बड़ी संख्या में संपन्न हुआ करते थे। स्वाधीनता संग्राम के आंदोलनों के समय नागरिकों को, विदेशी वस्त्र बहिष्कार करने का आह्वान करते हुए, स्वदेशी वस्त्र पहनने का अभियान चलाना भी, उक्त कार्यक्रमों का एक हिस्सा हुआ करता था।

जिन ज़िलों में तत्समय, स्वतंत्रता संग्राम आंदोलनों की अति तीव्र धारा प्रवाहित हो रही थी, उस समय वहां स्वाधीनता संग्राम के कार्यकर्ता, साहसपूर्वक खादी भंडारों की भी स्थापना कर देते थे। अनेक ज़िलों के स्वाधीनता संग्राम आंदोलनों के इतिहास, इस बात की जानकारी देते हैं कि, जब भी वहां खादी भंडार की स्थापना की जाती थी, तो समारोहपूर्वक उसका शुभारंभ होता था। सैकड़ों की संख्या में स्त्री और पुरुषों का जमावड़ा होता था। मिठाईयां बांटी जाती थी। खादी वस्त्रों की जमकर बिक्री होती थी। अनेक स्थानों पर तो, जब गणेश विसर्जन के जुलूस निकलते थे, तो गणेश जी की प्रतिमा को, खादी की सफ़ेद टोपी और खादी की ही धोती पहनाकर तथा उनके हाथ में चरखा बना झंडा बांधकर, चल समारोह निकाले जाते थे। असल में इस जुलूस का उद्देश्य तो, खादी का प्रचार करना ही रहता था। लेकिन धार्मिक जुलूस होने के कारण, तत्कालीन अधिकारी कुछ भी कार्यवाही नहीं कर पाते थे।

खादी भंडार की स्थापना को लेकर, एक समय रतलाम में खादी भंडार खोलने का एक मामला, साझा करना उचित मानता हूं। 10 जुलाई, 1931 को रतलाम के चौमुखीपुल पर एक खादी भंडार की शुरुआत की गई थी। यहां से खादी और स्वदेशी वस्त्रों का ज़ोर-शोर से प्रचार किया गया। इस शुभ अवसर पर एक जनसभा का आयोजन भी, खादी भंडार के बाहर किया गया था। सभी वक्ताओं ने विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार करने का आह्वान करते हुए, खादी के महत्त्व और उसे पहनने पर प्रकाश डाला। गांधी जयंती के मौके पर, घर घर जाकर, खादी बेचने का काम भी किया गया। खादी के प्रति रतलाम के इस महत्त्वपूर्ण योगदान के समाचार, प्रमुखता से तत्कालीन अखबार स्वाधीन भारत, कर्मवीर, स्वराज आदि में प्रकाशित हुए थे।

रतलाम के तत्समय के सुप्रसिद्ध स्वाधीनता संग्राम सेनानी और मेरे पूज्य पिता, श्री लहरसिंह जी भाटी, जो कि स्वाधीनता संग्राम के आंदोलन के दौरान, विदेशी वस्त्र बहिष्कार मंडल के, संचालन मंत्री रहे थे, बताते थे कि, जिस समय हम लोगों ने, विदेशी वस्त्र बहिष्कार आंदोलन प्रारंभ किया था, तब रतलाम का समूचा बाजार, जापानी और अंग्रेज़ी कपड़ों से भरा पड़ा था। उस समयकाल में, ऐसे आंदोलन को चलाना कोई हंसी खेल नहीं था। एक ओर हमें व्यापारियों के लोभ से जूझना पड़ता था, तो दूसरी तरफ़, जन साधारण के मन में बसे विदेशी वस्त्रों के मोह से भी लड़ना पड़ता था। हम लोगों ने, रतलाम में विदेशी वस्त्रों की होली जलाई। विदेशी वस्त्र बेचने वाले, व्यापारियों की दुकानों के सामने धरने दिए गए। उनका विदेशी वस्त्रों का स्टॉक सील किया और स्वदेशी कपड़ों के द्वारा, देश प्रेम की भावना को जगाने का प्रयास किया।

वे यह भी बताते थे कि, उस दौरान अंग्रेज परस्त रतलाम रियासत को, हमारी यह करतूतें जरा भी नहीं भाती थी। किंतु तत्समय राष्ट्रीय चेतना जाग्रत करने के लिए, यह अत्यंत आवश्यक था। हम सभी लोगों को, जो अपने देश से रंचमात्र भी प्रेम करते हैं, खादी वस्त्रों को भी पहनते रहना चाहिए। भले ही फैशन के नाते पहने, लेकिन उसे प्रचलन में जरूर लाएं। इस प्रकार जब हमारे आम और दैनिक जीवन में, खादी वस्त्रों का उपयोग होना शुरू हो जाएगा, तो वह दिन दूर नहीं रहेगा, जबकि एक दिन खादी वस्त्र, हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बन जाएंगे। खादी के वस्त्र पहनना, किसी के भी व्यक्तित्व की सौम्यता को ही दर्शाते हैं। खादी धारण करना, पहनने वाले को सुदर्शन भी बनाता है।
ललित भाटी, इंदौर
मो, 98270,08628


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