है मुश्किल राह सपनों की,
मगर चलता तू जा राही...

यह सच है आएगी मंजिल,
जो बरसों थी तूने चाही...

धूप और छांव, सुख और दुख,
तो नियत है, परीक्षा है...

न हिम्मत हार, ना घबरा,
चले चलता तू जा राही...

है मंजिल आएगी तेरी,
जो बरसों थी तूने चाही ।

डॉ. अनुराग दुबे
नागदा जिला उज्जैन (मप्र)