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रंग दो मन मोहन प्यारे


डॉ. अनिता जैन 'विपुला'

मनमोहन प्यारे रंग दो, आज मेरा हर अंग
झूम उठे दिल मेरा और, जग रह जाये दंग।

कान्हा कह रहे आओ प्रिये, यूं शरमाओ ना
हमें लगा लो गले, प्रीत रंग में भिगो दो ना
सखियां बैठी आस में, अब खेलो होरी संग
मन मोहन प्यारे रंग दो, आज मेरा हर अंग।

नैनों ही नैनो में हो गयी, शरारत भरी बात,
रोम-रोम पुलक उठा, जब छुआ तूने गात।
हम तो हो गये बावरे, आलम हो गया मलंग,
मनमोहन प्यारे रंग दो, आज मेरा हर अंग।।

धुल गए उलहाने, कोई चुनर न रही कोरी,
नेह ज्ञान का रंग चढ़ा, अब तो जोरा जोरी।
आनंद में झूमे मन ,पी ली हो जैसे भंग
मनमोहन प्यारे रंग दो, आज मेरा हर अंग।

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