Subscribe Us

विश्व हिंदी दिवस पर तमिलनाडु हिंदी अकादमी ने किए आयोजन

चेन्नई। विश्व हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में तमिलनाडु हिन्दी अकादमी का वार्षिक हिन्दी समारोह 10 जनवरी रविवार सुबह पूझल स्थित जैन विद्याश्रम में अनेक गतिविधियों के साथ सम्पन्न हुआ। रिसर्च फाउंडेशन फॉर जैनोलोजी के सहयोग से आयोजित इस समारोह में वरिष्ठ समाजसेवी विजयराज खाबिया मुख्य अतिथि थे। अकादमी अध्यक्ष डॉ. सु. कृष्णचंद चोरड़िया ने अपने स्वागत भाषण में विश्व हिंदी दिवस की परंपरा पर प्रकाश डाला और कहा कि जैन विद्याश्रम के विद्यार्थियों को दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा की हिंदी परीक्षाएँ दिलवाई जाएगी। इसमे विद्याश्रम की प्राचार्य एस्थर स्टेनली और हिंदी शिक्षिकाओं ने पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। महासचिव डॉ. दिलीप धींग ने अकादमी संस्थापक डॉ. बालशौरि रेड्डी को याद करते हुए अकादमी की विकास यात्रा से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि प्राकृत में भारतीय भाषाओं के साम्य के कई सूत्र उपलब्ध हैं।
इस अवसर पर तमिल-ं हिंदी विद्वान इ. जम्बूकुमारन् जैन और स. वसुमति बालकृष्णन् को वार्षिक हिंदी सम्मान से सम्मानित किया गया। उन्हें शॉल, मुक्ताहार, डॉ. धींग का साहित्य और सम्मान-ंउचयराशि प्रदान की गई। सचिव जे. अशोककुमार शास्त्री ने पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं का परिचय दिया। उन्होंने बताया कि जम्बूकुमारन ने दसवीं सदी के जैनाचार्य अमृतचंद्र के संस्कृत ग्रंथ पुरुषार्थ सिद्ध्युपाय की पं. टोडरमल द्वारा की गई हिंदी टीका का तमिल में अनुवाद किया। जम्बूकुमारन ने कहा कि हिंदी के विकास में धार्मिक साहित्य का भी योगदान है। विद्या विकास अकादमी, पू-हजयल की आराधना मिश्रा और उनकी टीम की बालिकाओं ने हिन्दी, तमिल और राजस्थानी गीतों पर नृत्य प्रस्तुतियाँ देकर सबको मुग्ध कर दिया। इस पर मुख्य अतिथि विजयराज खाबिया ने सभी बीस बालिकाओं को नकद पुरस्कार दिये और उनके लिए घुंघरू उपलब्ध करवाए। समारोह में डॉ. आर. गौरी की लघु काव्यकृति ‘क्या खोया क्या पाया’ का विमोचन किया गया। इसकी प्रस्तावना डॉ. धींग ने लिखी।
इस अवसर पर आयोजित विचार गोष्ठी में शोभा चोरड़िया, पमिता खींचा, प्रहलाद श्रीमाली, पी. जयराजन जैन, उमेश उमंग, तेजराज गहलोत, प्रमोदकुमार, सुनिता गिरी, ई. बालामणि, डॉ. उमापति शास्त्री, डॉ. बिनीता पांडेय, अर्पणा भारती आदि ने गद्य-ंउचयपद्य में विचार रखे। छात्र प्रणत धींग द्वारा प्रस्तुत डॉ. दिलीप धींग की कविता ‘दगा किसी का सगा नहीं’ खूब सराही गई। से. अनंतकृष्णन ने कहा कि उनके गाँव में अंग्रेजी स्कूलों के कारण तमिल विद्यालय बंद हो गये। कोषाध्यक्ष आर. कृष्णमूर्ति ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर देवेन्द्र बेताला, कमल खाबिया, संपत बागमार, सुभाष चोरड़िया, नवरतन मूथा, राजेन्द्र दशरहला, अजीत तातेड़, राजिंदरन चोरड़िया, पदमचंद चोपड़ा, अमृतलाल डागा, संजय खाबिया, मनीष तातेड़, सीमा धींग आदि बड़ी संख्या में हिंदीप्रेमी और हिंदीसेवी उपस्थित थे।

टिप्पणी पोस्ट करें

1 टिप्पणियां