Subscribe Us

वही इंसान तो अक्सर सही मंजिल नहीं पाता


✍️नवीन माथुर पंचोली

 

वही इंसान तो अक्सर सही मंजिल नहीं पाता।

जो सच्ची राह पर अपनी कभी चलकर नहीं जाता।

 

सभी मुश्किल उसे इस राह की हैरान करती है,

कभी जो हौसला अपना यहाँ लेकर नहीं आता।

 

वो बातें हैं यहाँ उसके लिए इक फ़लसफ़े जैसी,

हक़ीक़त में जिन्हें अपने अमल में जो नहीं लाता।

 

निभाते हैं सभी उसकी रिवायत को शराफ़त से,

बना रहता है जब उसका सभी से कुछ न कुछ नाता।

 

कभी वो ख्वाहिशें उसकी यहाँ पूरी नहीं होती,

कि जिसको ये नहीं भाता कि जिसको वो नहीं भाता।

 

*अमझेरा धार मप्र

 


अपने विचार/रचना आप भी हमें मेल कर सकते है- shabdpravah.ujjain@gmail.com पर।


साहित्य, कला, संस्कृति और समाज से जुड़ी लेख/रचनाएँ/समाचार अब हमारे वेब पोर्टल  शाश्वत सृजन पर देखेhttp://shashwatsrijan.com


यूटूयुब चैनल देखें और सब्सक्राइब करे- https://www.youtube.com/channel/UCpRyX9VM7WEY39QytlBjZiw 




टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां