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बुढ़ापा



✍️प्रो.शरद नारायण खरे
गुज़रा ज़माना नहीं,वर्तमान भी होता है बुढ़ापा,
सचमुच में चाहतें ,अरमान भी होता है बुढ़ापा ।

केवल पीड़ा,उपेक्षा,दर्द,ग़म ही नहीं,
असीमित,अथाह सम्मान भी होता है बुढ़ापा ।

ज़िन्दगी भर के समेटे हुए क़ीमती अनुभव,
गौरव से तना हुआ आसमान भी होता है बुढ़ापा।

पद,हैसियत,दौलत,रुतबा था भले ही,
पर सहज-सरल,मधुर,आसान भी होता है बुढ़ापा।

बेटा-बहू,बेटी-दामाद,नाती-पोतों के संग,
समृध्द,उन्नत ख़ानदान भी होता है बुढ़ापा ।

मंगलभाव,शुभकामनाएं,आशीष,और दुआएं,
सच में इक पूरा समुन्नत शुभगान भी होता है बुढ़ापा।

घुटन,हताशा,एकाकीपन,अवसाद और मायूसी,
गीली आँखें भरा पतन,अवसान भी होता है बुढ़ापा ।

संगी-साथी,रिश्ते-नाते,अपने-पराये मिल जायें यदि,
तो खुशियों से सराबोर महकता सहगान भी होता है बुढ़ापा।

 

*मंडला(मप्र)

 


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