Subscribe Us

रस्ता ठहरा-ठहरा क्यों है



*नवीन माथुर पंचोली

रस्ता ठहरा-ठहरा क्यों है।

घर के बाहर पहरा क्यों है।

 

सोच रही  हैं आँखें  भारी,

रात बिना तम गहरा क्यों है।

 

सबके मुश्किल हालातों में,

उनका ख़ाब सुनहरा क्यों है।

 

इंसानों की तो हद न कोई,

इंसा हद पर ठहरा क्यों है।

 

तन,मन,धन वालों का जमघट,

लगता आख़िर सहरा क्यों है।

 

आमजनों  की  सुनवाई में,

मुंसिफ़ इतना बहरा क्यों है।

 

अमझेरा धार मप्र

 


अपने विचार/रचना आप भी हमें मेल कर सकते है- shabdpravah.ujjain@gmail.com पर।


साहित्य, कला, संस्कृति और समाज से जुड़ी लेख/रचनाएँ/समाचार अब नये वेब पोर्टल  शाश्वत सृजन पर देखेhttp://shashwatsrijan.com


यूटूयुब चैनल देखें और सब्सक्राइब करे- https://www.youtube.com/channel/UCpRyX9VM7WEY39QytlBjZiw 

टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां