प्रेमचंद की कथाओं में नारी चित्रण विषय पर विमर्श एवं काव्यपाठ हुआ
उज्जैन। प्रेमचंद के साहित्य में उस समय की वास्तविक परिस्थितियों का सटीक चित्रण हुआ है। प्रेमचंद को जब भी पढ़ेंगे , हम उस युग को जी सकेंगे। प्रेमचंद समस्याएं उठाते हैं और समाधान भी पेश करते हैं। प्रेमचन्द के नारी पात्र क्रांति का सूत्रपात करते हैं।
ये विचार प्रेमचंद सृजनपीठ उज्जैन द्वारा साहित्य अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद के तत्वावधान में विक्रमादित्य शोध पीठ में प्रेमचंद की कथाओं में नारी चित्रण विषय पर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए सम्राट विक्रमादित्य विवि हिन्दी अध्ययनशाला की पूर्व अध्यक्ष एवं आचार्य डॉ. प्रेमलता चुटैल ने व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि आज महिलाओं को स्वतन्त्रता और उच्छंखलता में अंतर समझना होगा। अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए माधव महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. कल्पना सिंह ने कहा कि प्रेमचंद के कथा साहित्य में नारियों के पात्र अबला न होकर सबला हैं और समय समय पर सामने आकर समाज को सम्बल प्रदान करते हैं, दिशा देते हैं। आज कुटुंब का विघटन रोकने के लिए हमारी बेटियों को ही सामने आना होगा। नारी न तब अबला थी, न अब अबला है और न भविष्य में अबला रहेगी।
सारस्वत अतिथि आकाशवाणी उज्जैन केंद्र की निदेशक अनामिका चक्रवर्ती ने कहा कि एक नारी संस्कारित होकर परिवार और समाज को भी संस्कारित करती है। प्रेमचंद जी ने अपनी कहानियों में नारियों की संवेदनाओं को उंडेला है। हमें स्वयं के साथ पूरे परिवार, समाज को सशक्त बनाना है। मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए प्राध्यापक डॉ. प्रीति पांडे ने कहा कि प्रेमचंद जी कहानियाँ जन-जन से जुड़ी होकर, हमारी आपकी कहानी लगती है। प्रेमचंद युग, भारतीय स्वतन्त्रता और सुधार आंदोलन का भी युग है। प्रेमचंद जी ने अपने साहित्य में स्त्रियों के मनोविज्ञान को समझा है और लेखन में महिलाओं के मनोविज्ञान के सम्बंध में कोई भी विषय अछूता नहीं छोड़ा है।
इस अवसर पर कवयित्री सुश्री निशा पंडित, सुश्री शारदाश्री, डॉ माया बदेका, डॉ. नेत्रा रावणकर, श्रीमती प्रेमशीला श्रीवास्तव, श्रीमती अनामिका सोनी, सीमा देवेन्द्र, सुश्री संयोगिता शर्मा, सुश्री संगीता तल्लेरा, डॉ. नीता जाधव, डॉ. अभिलाषा शर्मा, सुश्री मेहा दुबे ,वैशाली शुक्ला ने अपनी नारी केंद्रित कविताएं एवं गीत सुनाकर संवेदनाएं जगाई। काव्य पाठ सत्र की अतिथि डॉ माया बदेका रही अध्यक्षता डॉ. प्रेमलता चुटैल ने की।
कथासम्राट प्रेमचंद जी के चित्र पर पुष्पांजलि और अनामिका सोनी की सरस्वती वंदना से आयोजन का शुभारम्भ हुआ। अतिथि स्वागत प्रेमचंद सृजनपीठ के निदेशक श्री मुकेश जोशी, देशना जैन, संगीता तल्लेरा ने किया। आयोजन में सम्राट विक्रमादित्य विवि कार्यपरिषद के वरिष्ठ सदस्य श्री राजेशसिंह कुशवाह, विक्रमादित्य शोध पीठ के कार्यकारी निदेशक डॉ. रमण सोलंकी, वरिष्ठ कवि दिनेश दिग्गज, अशोक भाटी, सुगनचंद जैन, सुरेन्द्र सर्किट, प्राची के अध्यक्ष व्यंग्यकार शशांक दुबे, वरिष्ठ व्यंग्यकार डॉ हरीशकुमार सिंह, डॉ.संदीप नाडकर्णी, ओज कवि राहुल शर्मा, प्रलभ श्रीवास्तव, डॉ अरुणेश्वरी गौतम आदि उपस्थित थे। विमर्श सत्र का संचालन डॉ. नेत्रा रावणकर ने और काव्य पाठ सत्र का सञ्चालन वैशाली शुक्ला ने किया। विमर्श सत्र का आभार प्रेमचंद सृजनपीठ के निदेशक मुकेश जोशी और काव्य सत्र का श्री दिनेश दिग्गज ने व्यक्त किया।


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