Subscribe Us

मौन साधक - सेवृक्ष



*अशोक 'आनन'

 

वृक्षों  का  कुंभ ।

कुंभ में -

मौन - साधक - से  वृक्ष ।

 

कोई -

कांटों की शैया पर लेटा ।

तो कोई -

धूनी     रमाकर    बैठा ।

कोई -

एक पांव पर यहाॅं खड़ा ।

तो कोई -

नागा  बाबा -  सा  ऐंठा ।

 

सर्दी , गर्मी या हो बारिश

कोई न लेता -

इनका पक्ष ।

 

कोई

वृक्ष है यदि जटाधारी ।

तो कोई -

स्वभाव से है कड़वा ।

कोई -

शहद - सा है मीठा - मीठा ।

तो कोई -

रत्न - सरीखा है जड़वा ।

कोई -

साधना में  ध्यान मगन ।

तो कोई -

बूढ़ा  अभी  भी  है जवां  ।

 

पत्थर खाए युगों - युगों से

लोक हित ही  -

इनका जीवन - लक्ष्य ।

 

*मक्सी जिला - शाजापुर ( म. प्र .)

 


अपने विचार/रचना आप भी हमें मेल कर सकते है- shabdpravah.ujjain@gmail.com पर।


साहित्य, कला, संस्कृति और समाज से जुड़ी लेख/रचनाएँ/समाचार अब नये वेब पोर्टल  शाश्वत सृजन पर देखेhttp://shashwatsrijan.com


यूटूयुब चैनल देखें और सब्सक्राइब करे- https://www.youtube.com/channel/UCpRyX9VM7WEY39QytlBjZiw 


 



टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां