म.प्र. साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा नारदमुनि पुरस्कार से अलंकृत

पेड़ का दर्द




*सुवर्णा जाधव

सदा मुस्कुराने वाला पेड़

निराश दिखाई दिया ,
मैंने पूछा
"क्या हुआ बाबा?"
"वट पूर्णिमा आयी"
उसने कहा ..

मैंने कहा, ,
"अच्छा है ना फिर,
कहां-कहां से महिलाएं आएंगी

पूजा करेगी,

तुम्हारा महिमा गाएगी"

पेड़ ने कहा ,
"उसी का तो रोना है "
गांव में अभी ठीक है
शहर में लेकिन बुरा हाल है।
गांव में महिला पेड़ों के पास

आकर पूजा करेगी,
शहर में महिला पेड़

घर में लाकर पूजा करेगी

सावित्री के पति के

मेरी पूजा से बच गए प्राण,
पर शहर में पूजा के लिए

टहनी तोड़-तोड़ मेरा ही लेगी प्राण।
इसलिए वट पूर्णिमा आती है,

दिल को दहलाती है ।

सखियों पेड़ का दर्द  जानो ,
पेड़ लगाओ ,
पेड़ बचाओ।
*महालक्ष्मी मुंबई


 



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