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जगन्नाथ रथ यात्रा



*राम गोपाल राही

चल भीड़ में सम्मुख देख जरा,

 विमान के दर्शन होते हैं |

उत्कंठा मन में जाग उठे ,

भगवान के दर्शन होते हैं ||

 

लाखों की भीड़ असंख्यों की  ,

सचमुच में भक्ति धारा की |

यह भीड़ अनोखी होती है ,

मत पूछो भव्य नजारा की ||

 

हम हरि (प्रभु )निहारा करते हैं ,

 हरि हमें निहारा करता है |

जय घोष गूँजता  जगन्नाथ ,

पल पल में पुकारा जाता है  ||

 

  वहाँ जगन्नाथ के अपने दर, 

  दर्शन  हीं भक्ति होती है |

भक्ति पथ दर्जन पूजन व ,

प्रदक्षिणा भक्ति होती है ||

 

सच जगन्नाथ जग के स्वामी ,

की पुरी अनोखी लगती है |

भक्तों का उमड़े  ज्वार वहाँ ,

अनुरक्ति अनोखी होती है ||

 

भगवान विष्णु अवतार कृष्ण ,

उत्सव व धाम उन्हीं का है |

सुसज्जित रथ में हरि विचरे ,

चैतन्य धाम उन्हीं का है ||

 

सौभाग्यशाली जन होते ,

जो चले पुरी में आते हैं |

अनुरक्त  ह्रदय में  ललक लिए , 

भगवान के दर्शन पाते हैं ||

 

 

मंदिर का दिव्य शिखर ऊँचा ,

विष्णु का चक्र सुदर्शन वहाँ |

 है भव्य भव्य मंदिर की ,

सच शोभा है अभिराम वहाँ ||

 

 वहाँ चक्र पताका दर्शन से ,

अभिज्ञान चेतना जगती है |

हो  रोम रोम में जिज्ञासा ,

आध्यात्म चेतना जगती है ||

 

जगदीशपुरी पथ भक्ति का ,

हृदय में दर्शन अभिलाषा |

अर्पित हो जिनका तन मन वहाँ,

 पूरी  हो उनकी अभिलाषा ||

 

 नित ठंडी हवा मन हर लेती ,

वहाँ शोर  भी प्यारा होता है |

मन मुदित रह रहे हरिदर्शन से ,

अनुपम वो  नजारा होता है ||

 

सागर तट कुछ ही दूरी पर ,

पुरी जगन्नाथ का धाम वहाँ |

 हरि तीर्थ अनोखा धरती पर ,

पावन  अनुपम है धाम वहाँ ||

*लाखेरी ,जिला बूँदी( राज )

 


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