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तुम्हारे  बिन परेशानी बहुत  है








*हमीद कानपुरी

 

तुम्हारे  बिन परेशानी बहुत  है।

तुम्हारे साथ आसानी बहुत  है।

 

हमें मतलब नहीं  कुछ सैकड़ों से,

खुदा की  एक यज़दानी बहुत है।

 

लिया बोसा भरी महफ़िल में मेरा,

अदाउसकी ये बचकानी बहुत है।

 

जिसे  चाहें उसे  टोकें कहीं  भी,

पुलिस वालों की मनमानी बहुत है।

 

बला आयी है अब तूफान बनकर,

जिधर देखो  उधर पानी बहुत है।

 

उन्हें तो याद करते तक नहीं अब,

वो जिनकी यार क़ुर्बानी‌ बहुत है।

 

*हमीद कानपुरी




 

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