म.प्र. साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा नारदमुनि पुरस्कार से अलंकृत

तुमने जिसको चाहा होगा



*बलजीत सिंह बेनाम


तुमने जिसको चाहा होगा
दिल उसका भी टूटा होगा


मिलने की इतनी बेचैनी
वादा करके भूला होगा


प्यार के बदले प्यार कहाँ अब
ऐसा पहले होता होगा


आँखें सपने देख रही हैं
आँखों को फिर धोखा होगा


सब कुछ छोड़ा रब पर मैंने
उसने अच्छा सोचा होगा


*बलजीत सिंह बेनाम


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