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रोशनी पर तो नहीं है उनका बस



*बलजीत सिंह बेनाम



रोशनी पर तो नहीं है उनका बस
तीरगी होती नहीं है टस से मस


आप मेरे बारे में चिंतित न हों
आप के बिन ही बिताए हैं बरस


इक अजब सा आदमी देखा अभी
ग़म को यूँ पीता है जैसे हो चरस


इस ज़माने की हवा को देखकर
अब परिंदा चाहता है ख़ुद क़फ़स


हिज्र तेरा उस पे दुनिया के सितम
कोई खाए मेरी हालत पर तरस


*बलजीत सिंह बेनाम,हाँसी



 

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