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प्रो शैलेन्द्रकुमार शर्मा बुंदेली उत्सव में लोक संस्कृति सम्मान से विभूषित


बुंदेली उत्सव के उद्घाटन समारोह में हुआ सम्मान



उज्जैन। छतरपुर में आयोजित राष्ट्रीय बुंदेली उत्सव में लोक संस्कृतिविद्, समालोचक एवं विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलानुशासक प्रो. शैलेंद्रकुमार शर्मा को मालवी लोक संस्कृति के क्षेत्र में किए गए विपुल लेखन और अवदान के लिए लोक - संस्कृति सम्मान से अलंकृत किया गया। उन्हें यह सम्मान मध्यप्रदेश के राजस्व और परिवहन मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने अर्पित किया। बुंदेली विकास संस्थान, छतरपुर द्वारा रविवार को आयोजित इस लोकोत्सव के उद्घाटन समारोह में प्रो शर्मा को स्व हरगोविंद हेमल स्मृति लोक संस्कृति सम्मान से अलंकृत किया गया। इस सम्मान के अंतर्गत प्रो. शर्मा को प्रशस्ति पत्र, सम्मान राशि, शॉल – श्रीफल अर्पित किया गया। लोक साहित्य, परम्परा और संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में विगत ढाई दशक से सक्रिय संस्थान के इस आयोजन में पूर्व विधायक एवं बुंदेली उत्सव के संरक्षण पूर्व विधायक श्री शंकर प्रताप सिंह मुन्ना राजा, प्रो बहादुर सिंह परमार आदि सहित लोक संस्कृतिकर्मी, कलाकार और रसिकजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।


आयोजन में संबोधित करते हुए प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा ने कहा कि लोक और जनजातीय संस्कृति के बिना भारत की पहचान सम्भव नहीं है। नए दौर में लोक  संस्कृति के समक्ष अनेक चुनौतियाँ हैं। लोक परम्पराओं के संरक्षण, संवर्धन और नवाचार के व्यापक प्रयास जरूरी हैं। बुंदेली उत्सव के उद्घाटन दिवस पर परम्परागत लोक नृत्य, संगीत, दंगल आदि के आयोजन किए गए, जिन्हें हजारों की संख्या में उपस्थित दर्शकों ने देर रात तक निहारा। 


समीक्षा एवं शोधपूर्ण लेखन में तीन दशकों से सक्रिय प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा ने साहित्य और लोक संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने शब्दशक्ति सम्बन्धी भारतीय और पाश्चात्य अवधारणा तथा हिन्दी काव्यशास्त्र, देवनागरी विमर्श, मालवी भाषा और साहित्य, मालवा का लोकनाट्‌य माच और अन्य विधाएं, मालव सुत पं सूर्यनारायण व्यास, हरियाले आँचल का हरकारा हरीश निगम, मालव मनोहर,  हिंदी कथा साहित्य, प्राचीन एवं मध्यकालीन काव्य, हिन्दी भाषा संरचना, अवन्ती क्षेत्र और सिंहस्थ महापर्व, हिंदी भाषा और नैतिक मूल्य आदि सहित चालीस से अधिक ग्रन्थों का लेखन एवं सम्पादन किया है। शोध पत्रिकाओं और ग्रन्थों में उनके तीन सौ से अधिक शोध एवं समीक्षा निबंधों तथा स्तरीय पत्र-पत्रिकाओं में आठ सौ से अधिक कला एवं रंगकर्म समीक्षाओं का प्रकाशन हुआ है। आपने भाषा, साहित्य और लोक संस्कृति से जुड़ी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की पन्द्रह से अधिक संगोष्ठी और कार्यशालाओं का समन्वय किया है। इस उपलब्धि पर अनेक शिक्षाविद्, संस्कृतिकर्मी और साहित्यकारों ने हर्ष व्यक्त कर प्रो शर्मा को बधाई दी। यह जानकारी राजभाषा संघर्ष समिति, उज्जैन के संयोजक डॉ अनिल जूनवाल ने दी। 


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