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सद्गगुणों की खान



*सुनील कुमार माथुर*

मां मां है

वह सद्गुगुणों की खान है

अच्छे संस्कारों के जरिये

उसने हमें जीना सीखाया है

मां के बारे में क्या कहूं

उसने हमें चलना सिखाया

उठना बैठना सिखाया

जीवन के अच्छे बुरे

सच झूठ का भेद कराया

इंसानियत , मोहब्बत , शराफत

भाईचारे और मेलजोल का पैगाम दिया

अनाचार , अत्याचार

व्यभिचार व , भष्टाचार से

दूर रहना सिखाया

मां मां है

वह करूणा की मूर्त है

प्यार , स्नेह व ममता की खान है

व्यसन , नशा , दुराचार और नफरत भाव से

दूर रहना उसने सिखाया

दुनियां की हर तरह की बुराइयों से

दूर रहना उसने हमें सिखाया

इस जग में मां जैसा दूसरा कोई नहीं

चूंकि

सदमार्ग से संसार में

प्रतिष्ठित  जीवन

व्यतीत करने योग्य

हमें मां ने ही बनाया है

 

*सुनील कुमार माथुर ,33 वर्धमान नगर शोभावतो की ढाणी खेमे का कुआ पालरोड जोधपुर राजस्थान


 






















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