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साथ में मुस्कुराते हैं(कविता)


*विजय कनौजिया*
चलो उदास चेहरे पर
आज मुस्कान लाते हैं
जो रूठे हैं मेरे अपने
उन्हें मिलकर मनाते हैं..।।

कुछ कमियां तो रही होंगी
हमारे बीच में शायद
चलो अब भूल जाओ तुम
साथ जीवन बिताते हैं..।।

जिस सपने को संजोते थे
तुम्हारे साथ मिलकर हम
चलो अब साथ फिर मिलकर
नए सपनें सजाते हैं..।।

तुम्हारे बिन जो गुजरा पल
बताना है बहुत मुश्किल
चलो अब रूठना छोड़ो
तुम्हें हम फिर मनाते हैं..।।

मेरी ये मुस्कुराहट भी
तुम्हारे बिन अधूरी है
चलो अब मान जाओ तुम
साथ में मुस्कुराते हैं..।।
साथ में मुस्कुराते हैं..।।

*विजय कनौजिया,नई दिल्ली


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