डॉ. राजेश रावल द्वारा अनूदित 'हिंदी-मालवी वार्तालाप' कृति का लोकार्पण
भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन में एक सराहनीय पहल: कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज
उज्जैन। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के रजत जयंती सभागृह में हिंदी एवं लोकभाषा मालवी के वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि डॉ. राजेश रावल 'सुशील' द्वारा अनूदित एवं सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित 'हिंदी मालवी संवाद/ वार्तालाप' कृति का लोकार्पण हुआ। प्रस्तुत कृति सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय हिंदी अध्ययनशाला की आचार्य एवं वरिष्ठ भाषा विज्ञानी प्रो. गीता नायक द्वारा लिखी गई हिंदी पुस्तक का मालवी अनुवाद है।
हिंदी अध्ययनशाला की आचार्य एवं लेखिका प्रो. श्रीमती गीता नायक की सेवा निवृत्ति पर विश्व विद्यालय द्वारा आयोजित विदाई समारोह में पुस्तक का लोकार्पण किया गया। इसके साथ ही डॉ संजय डावर द्वारा अनूदित 'हिंदी भिलाली संवाद' का भी विमोचन किया गया। समारोह की अध्यक्षता करते हुए सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर अर्पण भारद्वाज ने कहा कि, "भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन में यह एक सराहनीय पहल है। इस प्रकार के प्रयासों से भारतीय भाषाओं के साथ-साथ देश की विभिन्न अंचलों की बोलियों का संरक्षण करना चाहिए। मुख्य अतिथि शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रोफेसर हरिमोहन बुधौलिया ने कहा कि, 'हिंदी मालवी वार्तालाप' पुस्तक संवाद के माध्यम से समाज एवं परिवार में परिवार प्रबोधन को बढ़ावा देने वाली है। विशेष अतिथि डॉ कनिया मेढ़ा, रजिस्ट्रार डॉ अनिल शर्मा एवं प्रभारी संयुक्त निदेशक रीजनल फॉरेंसिक साइंस लैब इंदौर अरविंद नायक थे।
इस अवसर पर शाश्वत सृजन समाचार पत्र के संपादक संदीप सृजन, विश्व विद्यालय के पदाधिकारी, कवि, साहित्यकार एवं शोधार्थी छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। समारोह का संचालन विद्यार्थी कल्याण संकाय के अध्यक्ष प्रोफेसर सत्य किशोर मिश्रा ने किया एवं आभार डॉ कनिया मेढ़ा ने माना।


0 टिप्पणियाँ