मानवीय सत्य को उद्घाटित करती है लघुकथा-कांता रॉय
भोपाल। समकालीन लघुकथा मानवीय सत्य को उद्घाटित करती है। इसमें संप्रेषण की तीव्रता होती है और यह संक्षिप्त कलेवर में अपनी बात पूरे तेवर के साथ रखती है। यह उद्गार लघुकथा शोध केंद्र समिति, भोपाल की निदेशक कांता रॉय ने केंद्र द्वारा आयोजित बुधवारीय लघुकथा गूगल गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किए। वे साहित्यकार विनीता राहुरिकर के लघुकथा पाठ पर अपने विचार रख रही थीं।
कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉ. ममता माली ने स्वागत उद्बोधन दिया। इसके बाद मनमोहन चौरे के संचालन में गोष्ठी आगे बढ़ी। विनीता राहुरिकर ने अपनी लघुकथाओं ‘आकलन’, ‘अस्तित्व’, ‘मासूम आँखों की ज्वाला’, ‘चोंचले की कमाई’ और ‘जीवन का सन्नाटा’ का पाठ किया। ‘आकलन’ में लैंगिक असमानता और बेटे-बेटी के बीच दोहरे मापदंड, ‘अस्तित्व’ में स्त्री की स्वायत्तता एवं आत्मसम्मान, ‘मासूम आँखों की ज्वाला’ में युद्ध विभीषिका का बाल मन पर प्रभाव तथा ‘चोंचले की कमाई’ में श्रमजीवी वर्ग के दर्द को उकेरा गया। वहीं, ‘जीवन का सन्नाटा’ में सामाजिक जीवन के इर्द-गिर्द बुनी मानवीय संवेदनाओं को अभिव्यक्ति दी गई। गोष्ठी में उपस्थित रचनाकारों ने भी प्रस्तुत लघुकथाओं पर अपनी महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ दीं। अंत में लघुकथाकार विनीता राहुरिकर ने आभार व्यक्त किया।


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