संस्मरण कृति 'मां का गांव और बचपन' का लोकार्पण
कोटा। श्वेता शर्मा की कृति माँ का गाँव और बचपन का लोकार्पण समारोह अंतरराष्ट्रीय ग़ज़ल गायक एवं प्राचार्य प्रोफेसर रोशन भारती के मुख्य आतिथ्य में हुआ तथा अध्यक्षता शिशु भारती शिक्षण संस्थान के निदेशक योगेन्द्र शर्मा ने की। इस अवसर पर मार्गदर्शक जितेन्द्र निर्मोही, विशिष्ट अतिथि डॉ प्रभात सिंघल, विशिष्ट अतिथि डॉ विवेक कुमार मिश्र,सुमन शर्मा बूंदी, मुख्य वक्ता विजय जोशी रहे।मां वीणापाणि के पूजन उपरांत मां के समारोह में बेटी अनंदिता ने नाना जितेन्द्र निर्मोही कोटा की सरस्वती वंदना - जय जय वीणा पाणि तव,कर प्रकाश भर ज्ञान का वैभव प्रस्तुति दी। मधुकर काव्य सृजन संस्थान कोटा की ओर से स्वागत उद्बोधन जोधराज परिहार मधुकर ने प्रस्तुत कर समारोह का आगाज़ किया। कृतिकार श्वेता शर्मा का परिचय हेमराज सिंह हेम ने प्रस्तुत किया। इसकी काव्य प्रस्तुति डॉ सुशीला जोशी ने दी।
मुख्य अतिथि डॉ रोशन भारती ने कहा कि मनुष्य की स्मृति ही साहित्य का सच्चा घर है। यहां मां और बेटी के यादों में जो घर गांव बसा है सही मायने में वह जीवन का वह गान है जो साहित्य व संगीत के मूल में होने के साथ साथ संस्कृति के मूल में है। साहित्य मूलतः आत्मा का गान है जब हम सहज होकर जीवन समाज और संस्कृति के बारे में कुछ कहने की कोशिश करते हैं तो इस तरह की कृति सामने आती है । साहित्य को अपने घर परिवार और जीवन में उतारने वाले बिरले उदाहरण जितेन्द्र निर्मोही हैं जो हमारे आदर्श है । उन्होंने न केवल इस अंचल के लेखक लेखिकाओं को खड़ा किया अपनी बेटी को भी समाज को नई दिशा देने के लिए साहित्य समर्पण सीखाया है जिसका उदाहरण आज का समारोह है। अध्यक्षता कर रहे हैं योगेन्द्र शर्मा ने कहा कि यह कृति पाठकों को अपने ग्राम्य जीवन की ओर ले जाती है जहां खेत है, खलिहान है,पानसी का तोड़ना है, लोकजीवन है, नंदी का स्नान है,ब्याह शादी है। ऐसी कृतियां सामने आनी चाहिए।
बीज वक्तव्य मुख्य वक्ता विजय जोशी ने कहा संस्मरण साहित्य बातपोशी से सामने आया है। इसमें सभी विधाओं का समावेश हो जाता है।यह कृति इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है कि कृतिकार श्वेता शर्मा अपनी मां के संस्मरणों को सामने रखती हैं । जोशी ने हाड़ौती अंचल की प्रकाशित संस्मरण कृतियों का उल्लेख किया। डॉ विवेक मिश्र ने मां का गांव और बचपन कृति पर चर्चा करते हुए कहा कि यह कृति हमें हमारे बचपन के गांव समाज से एक साथ जोड़ती है। संस्मरणकार श्वेता शर्मा का यह पहला संस्मरण साहित्य जगत में अपनी विशेष पहचान रखेगा ऐसा विश्वास सहज किया जा सकता है। यह कृति पचास आधी शदी पहले के हाड़ौती अंचल के गांवों की पहचान व कहानी को मानव मन को और उस पूरे स्वभाव को रेखांकित करती है जिससे हमारी विशेष पहचान दुनिया के सामने है। बूंदी से आई शिक्षा विद सुमन शर्मा ने कहा कि कालान्तर में यह कृतियां ग्राम्य अंचल के जीवंत चित्रण बताने का मार्ग प्रशस्त करेगी। विशिष्ट अतिथि डॉ प्रभात सिंघल ने कहा कि यह कृति ग्राम्य जीवन की हलचल वहां के परिवेश पारिवारिक तारतम्य और सामाजिक संयोजन को बताती।कृति कार श्वेता शर्मा की शैली कथात्मक ऐसा लगता है कोई कथा कह रहा हो हम सुन रहे हो इसकी भाषा सहज है जिसमें हाड़ौती अंचल के शब्दों का चयन मोतियों की तरह पिरोया गया है। भाषा और शिल्प विधान से कथ्य सहज होने से कृति रुचिकर लगती है। मार्गदर्शक जितेन्द्र निर्मोही ने कहा संस्मरण दो प्रकार के होते हैं एक स्वयं के दूसरे सबको साथ लेकर चलने के इस कृति में दोनों का समावेश है।
समारोह का सफल संचालन नहुष व्यास ने किया। समारोह में भगवती प्रसाद गौतम, मुरलीधर गौड़, विजय शर्मा, विजय महेश्वरी, किशन वर्मा, आनंद हजारी, महावीर मेहरा, महेश पंचोली,रीता गुप्ता, स्नेहलता शर्मा, डॉ युगल सिंह, अनुराधा शर्मा, रेणुका चौधरी, गरिमा राकेश गर्विता आदि ने अपनी भागीदारी दी।


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