म.प्र. साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा नारदमुनि पुरस्कार से अलंकृत

वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का स्वर है -विनय पत्राले

वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का स्वर है – विनय पत्राले

उज्जैन। सरदार पटेल ने स्वतंत्र भारत को एक सूत्र में पिरोने का महान कार्य किया। उन्होंने देश की सैकड़ों रियासतों का एकीकरण कर अखंड भारत की मजबूत नींव रखी, जिसके कारण आज भारत एक सशक्त राष्ट्र के रूप में स्थापित है।

ये विचार भारत भारती और सम्राट विक्रमादित्य विवि उज्जैन के संयुक्त तत्वावधान में वन्दे मातरम् के एक सौ पचास वर्ष पूर्ण होने और सरदार वल्लभभाई पटेल के शार्घ शताब्दी वर्ष में उनके अखंड भारत के स्वप्न को स्मरण करते हुए सम्राट विक्रमादित्य विवि के शलाका दीर्घा सभागृह में विचार कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत भारती के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री विनय पत्राले ने व्यक्त किये। आनंदमठ, वंदे मातरम तथा लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के ऐतिहासिक योगदान पर आपने कहा कि आनंदमठ से जन्मा राष्ट्रगीत वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का स्वर है। उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि वंदे मातरम को सामूहिक रूप से गाया जाना चाहिए, ताकि राष्ट्रीय चेतना, एकता और देशप्रेम की भावना और अधिक सुदृढ़ हो।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु डॉ. अर्पण भारद्वाज जी ने सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत के एकीकरण का कार्य अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण था, जिसे सरदार पटेल ने अपने दृढ़ संकल्प, दूरदर्शिता और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता से सफल बनाया। उन्होंने कहा कि आज का एकीकृत भारत सरदार पटेल की राष्ट्रनिष्ठा और नेतृत्व क्षमता का परिणाम है। कार्यक्रम के विशेष अतिथि प्रो. दिवाकर नातू ने कहा कि ऐसे कार्य करो कि दूसरे लोग आपको बड़ा समझने लगें और एक अच्छे इंसान की तरह हमें जीना है क्योंकि एक अच्छा इंसान सबका भला कर सकता है। भारत भारती के राष्ट्रीय संयोजक दत्तात्रय सालुंके ने भी अपने विचार व्यक्त किये। 

स्वागत भाषण संयोजक डॉ. प्रवीणा दवेसर ने दिया। कार्यक्रम का शुभारम्भ भारत माता और माता सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप आलोकन से हुआ। भारत भारती वंदना सूरज नागर ने प्रस्तुत की, वन्दे मातरम गीत का गायन भाग्यश्री और भारत माता की आरती का गायन अर्चना तिवारी ने किया। अतिथि स्वागत प्रो. हरिमोहन बुधौलिया , डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा , डॉ. हरीशकुमार सिंह , सुश्री अदिति दवे , डॉ. शैलेन्द्र पांडे , डॉ. पाँखुरी वक्त आदि ने किया। कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार शर्मा , प्रो. नागेश्वर राव , डॉ. उमेशकुमार सिंह , प्रो. राकेश डांड, प्रो. शैलेन्द्र पाराशर , प्रेमचन्द सृजन पीठ के निदेशक मुकेश जोशी , डॉ. तपस्या ठाकुर , डॉ. उर्मि शर्मा सहित बड़ी संख्या में सुधिजन उपस्थित रहे। अतिथियों को स्मृति चिन्ह कुलगुरु डॉ. अर्पण भारद्वाज , डॉ. प्रवीणा दवेसर ने भेंट कियेे, भारत माता की आरती से कार्यक्रम का समापन हुआ। संचालन डॉ. पाँखुरी वक्त ने किया और आभार डॉ. विश्वजीत परमार ने व्यक्त किया।

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