म.प्र. साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा नारदमुनि पुरस्कार से अलंकृत

हिंदी ही जन-जन की भाषा है -शशांक दुबे

हिंदी ही जन-जन की भाषा है -शशांक दुबे

विश्व हिंदी दिवस पर प्रेमचंद सृजन पीठ द्वारा संगोष्ठी आयोजित


उज्जैन। आज हिंदी ही बातचीत का मुख्य माध्यम है और हिंदी ही जन-जन की भाषा है। आप अंग्रेजी में कितनी ही पढ़ाई कर लें मगर व्यावहारिक रूप से दैनिक जीवन में सिर्फ हिंदी भाषा ही काम आएगी। हिंदी फिल्मों ने भी हिन्दी भाषा को लोकप्रिय बनाने में अतुलनीय योगदान दिया है और वैश्विक फिल्मों से इतर हमारी फिल्मों के हिन्दी गाने और संवाद महत्वपूर्ण रहे हैं। हमारी फिल्मों के गीत विश्व में लोकप्रिय हुए हैं। ये विचार प्रेमचंद सृजन पीठ द्वारा विश्व हिंदी दिवस पर भारतीय ज्ञानपीठ महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार और ख्यात फिल्म समीक्षक श्री शशांक दुबे ने 'वैश्विक परिप्रेक्ष्य में हिन्दी' विषय पर अध्यक्षीय उद्बोधन में व्यक्त किये। 

प्रमुख वक्ता वरिष्ठ कवि और साहित्यकार श्री दिनेश दिग्गज ने कहा कि सम्पर्क भाषा केवल हिंदी ही हो सकती है। अब यह देश की नौनिहाल पीढ़ी का दायित्व है कि वह हिंदी भाषा को अपनाएं। हमारी भाषा भूषा पर आक्रमण कर हिन्दी ही नहीं हमारी संस्कृति को कमजोर किया जा रहा है । वहीं दूसरी ओर हमारे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई शिक्षा नीति को प्रदेश में सर्वप्रथम लागू कर हिन्दी को बढाने का यशस्वी कार्य किया है। विषय प्रवर्तन करते हुए प्रेमचंद सृजन पीठ के निदेशक श्री मुकेश जोशी ने कहा कि कलम के सिपाही, उपन्यास सम्राट प्रेमचंद ने हिन्दी की अप्रतिम सेवा की है, उनका स्मरण जरूरी है। उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों से अपने हस्ताक्षर हिन्दी में करने की शुरुआत करने का आह्वान भी किया।

अतिथियों ने माँ सरस्वती और प्रेमचंद जी के चित्र पर माल्यार्पण और दीप आलोकन कर आयोजन का शुभारम्भ किया। अतिथि स्वागत प्राचार्य डॉ अर्चना श्रीवास्तव, सुगनचंद जैन, संतोष सुपेकर, सुरेन्द्र सर्किट आदि ने किया। आयोजन में संदीप कुलश्रेष्ठ , डॉ चंदर सोनोने, वरिष्ठ कवि अशोक भाटी, कवयित्री संगीता तल्लेरा आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन करते हुए व्यंग्यकार डॉ हरीश कुमार सिंह ने कई उद्धरणों से हिन्दी को विश्व की एक नम्बर भाषा बताया। आभार निदेशक मुकेश जोशी ने व्यक्त किया। 

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