म.प्र. साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा नारदमुनि पुरस्कार से अलंकृत

हमारे भीतर ही हैं सुख और आनन्द -कैवल्य स्मार्त

रतलाम।श्री अरविन्द मार्ग स्थित ओरो आश्रम, रतलाम में 5 दिसम्बर से "पूर्णयोग" विषय पर पांँच दिवसीय स्वध्याय, साधना, सत्संग, समागम शिविर आरम्भ हुआ। प्रथम दिन इसे सम्बोधित करते हुए श्री अरविन्द सोसायटी, सूरत से पधारे मुख्य वक्ता श्री कैवल्य स्मार्त ने कहा कि हमारे भीतर ही ज्ञान, संतोष, प्रेम, शक्ति, आनन्द और सुख है मगर हम इन्हें बाहर खोजते फिरते हैं। हमारी स्थिति कस्तूरी मृग जैसी है।


उन्होंने कहा कि हृदय की गुफा की गहराई में दिव्य विराजमान है और हमारे योग की प्रथम क्रिया भी भीतर जाने की क्रिया ही है। हम अनन्त शक्ति, अनन्त ज्ञान और अनन्त आनन्द की अभीप्सा करते हैं मगर इसके लिए हमें ही अनन्त बनना पड़ेगा। पूर्णयोग में प्रभु हमसे उनके कार्य में जुड़ने की अपेक्षा करते हैं। अतः हम श्रीमांँ के सामर्थ्यवान बच्चे बने। हमारा प्रयास इसी दिशा में होना चाहिए।

प्रारम्भ में श्री अरविन्द के दिव्य देहांश स्थल (समाधि) पर सामूहिक ध्यान हुआ। मातृकक्ष में प्रणाम के पश्चात श्री कैवल्य भाई ने श्रीअरविन्द और श्रीमांँ के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर शिविर का शुभारंभ किया। वरिष्ठ साधक श्री रमेशचन्द्र पाठक ने शिविरार्थियों का स्वागत किया। सुश्री ऋतम् उपाध्याय ने वन्दना प्रस्तुत की। शिविर में हरिद्वार,इंदौर, बड़ोदा, झालोद, झांसी, धार, चित्तौड़गढ़ और रतलाम के श्रद्धालु उपस्थित रहे।

(यशपाल तंँवर,रतलाम द्वारा)

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