म.प्र. साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा नारदमुनि पुरस्कार से अलंकृत

करिये दो दो हाथ (दोहे) - हमीद कानपुरी


विपदा से डरिये नहीं, करिये दो दो हाथ।
अपनों का मत छोड़िये, कभी भूल कर साथ।

भूल जटिलता को रखो,सीधा सरल स्वभाव।
अगर चाहते हो बड़ा, जीवन में कुछ भाव।

सिर्फ़ नहीं सत्ता बदल , बदलेगी औक़ात।
बदलोगे आमाल जब , बदलेंगे हालात।

सत्ता का यारों बना , चौथा पाया दास।
जनता की आवाज़ था,आज गले की फास।

गायब है आवाज़ तक, बिगड़े सारे राग।
एक तरफ़ अजगर दिखे,एक तरफ़ है नाग।

हमीद कानपुरी

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