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चुनाव में खड़ा हुआ प्रत्याशी


मुझ प्रत्याशी की सुनो, वो तुम्हारी सुनेगा
तुम एक वोट दोगे, वो दस नोट देगा।

भूख लगे तो खाना खाना
प्यास लगे तो पानी पीना
नोट इसलिए देता हूँ कि
वोट से है मेरा मरना जीना
नोट के बदले वोट ही देना
और कोई तुम चोट न देना।

माना कि तुम वोट के खातिर
अपनी अकड़ दिखाओगे
बोतल -कम्बल तो दूंगा ही
जो मांगोगे, वो सब पाओगे
वोट चाहिए मुझे तो केवल
और कोई तुम खोट न देना।

पक्के घर मैं दिलवा दूंगा
बिजली पानी मिल जाएगा
एक वोट के बदले प्यारे
जीने का सुख मिल जाएगा
यह चुनाव का सीज़न है
तुम बाद़ाम अख़रोट न देना।

तुम ही मेरे माई बाप हो
तुम ही मेरे भाग्यविधाता
हाथ जोड़ता पांव में पड़ता
और झुकाता अपना माथा
अच्छी खासी जीत दिलाना
भागते भूत लंगोट न देना।

-डॉ रमेशचन्द्र, इंदौर 

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