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राजुरकर राज ने साहित्य में विचारधारा की सीमाओं को तोड़ा


भोपाल। राजुरकर राज ने साहित्य में विचारधारा की सीमाओं को तोड़ा,नए लोगों को मंच उपलब्ध करवाया । दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय के नवाचारी प्रयोग अनुकरणीय हैं ,संग्रहालय के संस्थापक राजुरकर राज एक दृष्टि सम्पन्न व्यक्ति थे ,उन्होंने संग्रहालय के माध्यम से साहित्य संस्कृति को नई दिशा प्रदान की। यह उदगार हैं वरिष्ठ कवि कथाकार सन्तोष चौबे कुलाधिपति रवींद्रनाथ टैगोर विश्विद्यालय भोपाल ने दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय द्वारा 'राजुरकर राज स्मृति सम्मान' समारोह में व्यक्त किए। समारोह में वरिष्ठ  साहित्यकार राकेश पांडेय ,नई दिल्ली को प्रथम राजुरकर राज स्मृति सम्मान समारोह प्रदान किया गया।

इस अवसर पर संग्रहालय की आम सभा में नवीन कार्यकारिणी का गठन भी किया गया। जिसमें अध्यक्ष रामराव वामनकर ,वरिष्ठ उपाध्यक्ष घनश्याम मैथिल'अमृत' ,एवम विपिन बिहारी बाजपेयी ,सचिव करुणा राजुरकर ,संयुक्त सचिव सुरेश पटवा,कोषाध्यक्ष बलराम धाकड़ को सर्वसम्मति से चुना गया ,इसके साथ ही अन्य दस कार्यकारिणी सदस्य भी चुने गए। संग्रहालय के संस्थापक निदेशक राजुरकर राज के जन्मदिवस पर उनकी स्मृति में 'राजुरकर राज' स्मृति कक्ष का लोकार्पण भी किया गया ,जिसमें राजुरकर जी द्वारा प्रयोग की गई वस्तुओं को प्रदर्शित किया गया है।


आयोजन में विक्रम झिंझोरकर एवम साथियों ने कबीर भजनों की सांगीतिक प्रस्तुति दी। तथा डॉ अरविंद सोनी ने राजुरकर लिखित गीत ,विशाखा राजुरकर ने उनकी कविता और घनश्याम मैथिल 'अमृत' ने राजुरकर जी लिखित एक पत्र का वाचन किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में के.जी.सुरेश कुलपति माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्विद्यालय भोपाल ने कहा कि 'देश में दस्तावेजीकरण की परम्परा आवश्यक है ,साक्ष्यों के अभाव में चीजें मिथक बन जाती हैं , साहित्यकारों का भी नेताओं अभिनेताओं की तरह संग्रहालय बनना चाहिए ।

सारस्वत अतिथि शशांक वरिष्ठ साहित्यकार एवम पूर्व अपर महानिदेशक दूरदर्शन ने भी अपने विचार प्रकट करते हुए इसके संस्थापक राजुरकर राज का स्मरण करते हुए राजुरकर राज अतीत और वर्तमान के बीच संतुलन बनाने का कार्य किया। संग्रहालय की गतिविधियों की प्रसंशा करते हुए संग्रहालय को यथा सम्भव योगदान देने की घोषणा की।

इस अवसर पर डॉ विकास दवे ,मुकेश वर्मा, आलोक त्यागी,राजेन्द्र गट्टानी,अशोक निर्मल , कांता राय, विनय उपाध्याय ,विजय कुमार देव ,मिथलेश वामनकर, बलराम धाकड़, कर्नल डॉ गिरजेश सक्सेना , अशोक धमेनियाँ, मनोरमा पन्त ,महेश सक्सेना,अरविंद सोनी,विशाखा राजुरकर,देवेंद्र कुमार जैन, विनोद नगर, विनोद नागर सहित नगर के अनेक साहित्यकार एवम राजुरकर के प्रेमी मित्र और परिवारजन उपस्थित थे ।आभार संग्रहालय की सचिव करुणा राजुरकर ने व्यक्त किया।

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