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हर दिन मेरा है


माया बदेका

हर दिन मेरा है
एक दिन, मत नाम करो मेरे।
किसी एक जगह को बता दो, 
जहां वजूद नहीं मेरा।
कौन कहता है ,
किसे इतनी छूट है।
कौन है वह?
जो बाँधे मुझे बँधनों में
जो बाँधे मुझे सीमाओं में।
जो बाँधे मुझे दिनों में।
और वह भी एक दिन।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस ??
सृष्टि की संरचना में ईश्वर ने मुझे चुना।
फुदकती चिड़िया हूँ ,
मैं रम्भाती गाय हूँ।
दहाड़ती शेरनी हूँ, 
तो कोमल माँ हूँ।
सृष्टि, वृष्टि, दृष्टि सबमें पुष्टि है
तमस घिरने नहीं देती
दहकती आग हूँ ,
पर जलने नहीं देती।
नरम फुहार हूँ,
मीठी मनुहार हूँ।
पात्र नहीं केवल पात्रता हूँ।
जीवन की पूरी सम्पूर्ण यात्रा हूँ।
मत बाँधो ,मत बाँधो, मत बाँधो।
बँधन के बोल, बँधन के तोल
सम्पूर्णता को, सरहद बना देते हैं।
सूत्र हूँ में, मुझे सूत्रधार न बनाओ।
जो जीवन दायिनी है सभी की।
उसका एक दिन, महत्व न गिनाओ।
उसका एक दिन ,महत्व न गिनाओ।

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