म.प्र. साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा नारदमुनि पुरस्कार से अलंकृत

खुली आँख से ख़्वाब देखा करेंगे


हमीद कानपुरी
खुली आँख से ख़्वाब देखा करेंगे।
उन्हें हर तरह मिल के पूरा करेंगे।

सही बात कहना तो जारी रहेगा,
न बेजा मगर कोई शिकवा करेंगे।

सजाते रहेंगे सजाते रहे हैं,
चमनमें सुमन बन केमहका करेंगे।

वतन के लिए जान देंगे यक़ीनन,
वतनको कहींभी न‌ रुसवा करेंगे।

अदू चढ़के आया जो अब सरहदों पर,
उसे बीच से चीर टुकड़ा करेंगे।

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