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भूल हर एक शिकवा नये साल में


हमीद कानपुरी
भूल हर एक शिकवा नये साल में।
वक्त अच्छा बिताना नये साल में।

बह्र में ही रहें नज़्म औ गीत हर,
गा नया अब तराना नये साल में।

आम जनता के चेहरे पे मुस्कान हो,
देश सुन्दर बनाना नये साल‌ में।

जहमतें भूल जाना गये साल की,
कष्ट अब मत उठाना नये साल में।

उनको बढने न देना ज़रा भी हमीद,
मुश्किलें सब मिटाना नये‌ साल में।

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