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विश्व भाषा अकादमी की तेलंगाना इकाई की कार्यकारिणी की बैठक सम्पन्न

हैदराबाद। विश्व भाषा अकादमी, भारत की तेलंगाना इकाई की कार्यकारिणी समिति की पहली मीटिंग का ऑनलाइन आयोजन दिनांक 12 दिसम्बर को किया गया। तेलंगाना प्रदेशाध्यक्ष सरिता सुराणा ने बताया कि बैठक का प्रारम्भ ज्योति नारायण की सरस्वती वंदना के साथ हुआ। तत्पश्चात अध्यक्ष ने सभी सदस्यों का स्वागत किया और विश्व भाषा अकादमी भारत की गतिविधियों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि इस मीटिंग को रखने का मुख्य उद्देश्य है अकादमी के आगामी कार्यक्रमों के बारे में विचार-विमर्श करना और कार्यकारिणी सदस्यों को उनके दायित्वों से अवगत कराना। अपनी बात जारी रखते हुए उन्होंने आगे कहा कि हम जानते हैं कि अपने भावों को अभिव्यक्त करने में और इंसान के जीवन में भाषा का बहुत अधिक महत्व है। आदिम काल से लेकर आधुनिक काल तक अनेक भाषाओं का विकास हुआ। कुछ काल के प्रवाह के साथ अक्षुण्ण बनी रहीं तो कुछ विलुप्त हो गईं। हमारे देश में जैसे भिन्न-भिन्न धर्मों और सम्प्रदायों के लोग रहते हैं, वैसे ही भिन्न-भिन्न भाषा-भाषी भी रहते हैं। हमारे देश में लगभग 19500 बोलियां मातृभाषा के रूप में बोली जाती हैं, उनमें से 121 भाषाएं ऐसी हैं जो 10000 या उससे अधिक लोगों द्वारा बोली जाती है। हमारे देश में हिन्दी भाषा सबसे ज्यादा बोली जाती है। इसकी अनेक उप भाषाएं हैं जैसे- अवधी, ब्रजभाषा, कन्नौजी, बुन्देली, मैथिली, ढूंढाड़ी, हाड़ौती, मारवाड़ी, मेवाड़ी, बघेली, भोजपुरी, हरियाणवी, छत्तीसगढ़ी, मालवी, नागपुरी, पंचपरगनिया, मगही, कुमाऊनी आदि। हिन्दी भाषा के बाद सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाएं हैं- बंगाली, मराठी, तेलुगु, तमिल, गुजराती, राजस्थानी, उर्दू, कन्नड़, उड़िया और मलयालम आदि। 

सर्वप्रथम अकादमी के परामर्शदाता सुहास भटनागर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हमें अकादमी के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए तेलुगु भाषा के साहित्यकारों और कुछ रिटायर्ड प्रोफेसर्स को जोड़ना चाहिए, जिससे कि उनके अनुभवों से हम तेलुगु साहित्य के बारे में ज्यादा जानकारी हासिल कर सकें, साथ ही साथ हिन्दी भाषा के साहित्य को भी बढ़ावा दे सकें। एक और परामर्शदाता डॉ.सुमन लता ने अपने सुझाव देते हुए कहा कि हमें अनुवाद को बढ़ावा देना चाहिए, तभी हम अन्य भारतीय भाषाओं के साहित्य के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने स्वयं दक्षिण भारतीय भाषाओं- तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम के साहित्य की अनुवादित रचनाओं को विश्व भाषा अकादमी के व्हाट्स ऐप ग्रुप में पोस्ट करने की बात कही। सभी सदस्यों ने करतल ध्वनि से उनकी इस पहल का स्वागत किया। प्रदीप देवीशरण भट्ट ने अपनी बात रखते हुए कहा कि कार्यकारिणी में उन्हीं सदस्यों को रखा जाए जो अपने काम के प्रति गम्भीर हों। साथ ही अब हमें हमारी मीटिंग ऑनलाइन की जगह आमने-सामने करनी चाहिए और प्रत्येक सदस्य बारी-बारी से इसकी मेजबानी करे। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य के लिए अर्थ की आवश्यकता होती है और अकादमी की सदस्यता निशुल्क है तो हमें इस तरह के विकल्प अपनाने होंगे। 

ज्योति नारायण ने अपने सुझावों के अन्तर्गत कहा कि हम प्रत्येक गोष्ठी में एक हिन्दी साहित्यकार या अन्य भारतीय भाषाओं के साहित्यकार को आमंत्रित करें और उनके साहित्य का हिन्दी अनुवाद करके उसकी रिकॉर्डिंग भी करें। हम सब मिलकर सभी सुझावों पर अमल करें और अकादमी के उद्देश्यों की पूर्ति में अपना योगदान दें। सुनीता लुल्ला ने कहा कि कार्य को सुचारू रूप से संपादित करने के लिए सभी सदस्यों को अपनी-अपनी जिम्मेदारी सौंप दी जाए ताकि व्यवस्था बनी रहे। जैसे व्हाट्स ग्रुप और साक्षात्कार वगैरह लेने की जिम्मेदारी। इसके साथ ही उन्होंने सिंधी और पंजाबी भाषा के साहित्य का हिन्दी अनुवाद करके पटल पर प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी ली। सभी सदस्यों ने उनके इस कार्य की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। मीना खोंड ने कहा कि आजकल सभी बच्चे ज्यादा से ज्यादा अंग्रेजी बोलने लगे हैं। उन्हें न तो अपनी मातृभाषा का और न ही हिन्दी भाषा का पर्याप्त ज्ञान है। पुस्तकें पढ़ने की प्रवृत्ति दिनों-दिन कम होती जा रही है। हमें हमारी सामाजिक जिम्मेदारी समझकर इस दिशा में भी काम करना चाहिए। संगीता शर्मा ने भी हिन्दी भाषा के घटते प्रयोग के बारे में अपनी चिन्ता व्यक्त की और कहा कि हिन्दी भाषा को रोमन लिपि में न लिखकर देवनागरी लिपि में लिखना चाहिए। आर्या झा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हमें साहित्यिक के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भी बढ़ावा देना चाहिए। बच्चों में हिन्दी भाषा के प्रति लगाव पैदा करने के लिए समय-समय पर निबन्ध प्रतियोगिता और कलाओं को बढ़ावा देने के लिए चित्रकला प्रतियोगिता और गायन-वादन प्रतियोगिताओं का आयोजन करना चाहिए। स्कूलों में सम्पर्क करके वे यह कार्य कर सकती हैं। सभी सदस्यों ने उनके इस सुझाव का उत्साहपूर्वक समर्थन किया और अपना सहयोग देने का वादा किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में सरिता सुराणा ने कहा कि हमारा उद्देश्य अकादमी के उद्देश्यों को पूरा करना है, जिसके अन्तर्गत हमें हिन्दी भाषा के साहित्यकारों के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओं, कलाओं और पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़े हुए समर्पित व्यक्तियों के साथ सम्पर्क स्थापित करके उनके कार्यकलापों को लोगों के समक्ष लाना है। हम प्रत्येक गोष्ठी में ऐसे लोगों से बातचीत करेंगे। उन्होंने सभी सदस्यों के सुझावों को अमल में लाने के लिए, एक-दूसरे का सहयोग करने और एक तकनीकी सहायक की आवश्यकता पर बल दिया। सभी सदस्यों ने इस बात का पूर्ण रूप से समर्थन किया।      
ज्योति नारायण के धन्यवाद ज्ञापन के साथ गोष्ठी सफलतापूर्वक संपन्न हुई। कार्यकारिणी का पुनर्गठन करते हुए निम्नलिखित सदस्यों को ये ज़िम्मेदारी सौंपी गई- अध्यक्ष:सरिता सुराणा, उपाध्यक्ष: प्रदीप देवीशरण भट्ट, महासचिव: ज्योति नारायण, संयुक्त सचिव: आर्या झा, सह सचिव: मंजुला दूसी, कोषाध्यक्ष: संगीता जी.शर्मा, कार्यकारी संयोजिका: सुनीता लुल्ला, मीडिया प्रभारी: के. राजन्ना।

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