Subscribe Us

काश नारी पत्थर की होती


✍️अर्पणा दुबे

काश नारी  पत्थर की होती

सुन्दर रहती हूं तो मेरा दोष

बदसूरत रहती हूं तो मेरा दोष

पढ़ाई करू तो मेरा दोष

न पढु तो मेरा दोष

पढ़ लिख कर कुछ बन जाऊँ तो मेरा दोष

कुछ न बनूँ तो मेरा दोष

घर के अन्दर रहूं तो मेरा दोष

घर के अन्दर न रहूं तो मेरा दोष

नारी चीख़ चीख़ कर पूछे ईश्वर से

तुने मुझें ये जीवन क्यू दिया

काश नारी को बना देता पत्थर का

डर लगता हैं इस दुनिया से

जब होता अत्याचार 

तो लोग कहे  नारी की गलती

बेटी रो-रो कर माँ से बोलें

मेरे वजह से सहना पड़ता हैं 

इस दुनियां के ताने

कहां जाऊँ कहां छिपू

इन दरिन्दों से

यहीं मेरा दोष की मैं एक नारी हूं

मैं एक बेटी हूं

बस तू इतना प्रार्थना सुन ले  ईश्वर

नारी को बना दे पत्थर का।।

 

*अनूपपुर मध्यप्रदेश


अपने विचार/रचना आप भी हमें मेल कर सकते है- shabdpravah.ujjain@gmail.com पर।


साहित्य, कला, संस्कृति और समाज से जुड़ी लेख/रचनाएँ/समाचार अब हमारे वेब पोर्टल  शाश्वत सृजन पर देखेhttp://shashwatsrijan.com


यूटूयुब चैनल देखें और सब्सक्राइब करे- https://www.youtube.com/channel/UCpRyX9VM7WEY39QytlBjZiw 




टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां