Subscribe Us

व्यंग्यिकाएं



✍️अशोक 'आनन'

 

विवशता

 

वे आज

हिन्दी में बतियाने को 

विवश हैं ।

क्योंकि -

आज ' हिन्दी दिवस ' है ।

                            

 

कमाल

 

'हिन्दी दिवस ' मनाते - मनाते

हिन्दी -

विस्थापित ।

और -

वे हो गए स्थापित ।

 

उपलब्धि

 

उन्होंने

जीवन भर जो नहीं पाया

वो 

कुछ वर्षों में पा लिया ।

'हिन्दी दिवस'

तेरा लाख - लाख शुक्रिया ।

 

*मक्सी,जिला - शाजापुर ( म.प्र.)

 


अपने विचार/रचना आप भी हमें मेल कर सकते है- shabdpravah.ujjain@gmail.com पर।


साहित्य, कला, संस्कृति और समाज से जुड़ी लेख/रचनाएँ/समाचार अब नये वेब पोर्टल  शाश्वत सृजन पर देखेhttp://shashwatsrijan.com


यूटूयुब चैनल देखें और सब्सक्राइब करे- https://www.youtube.com/channel/UCpRyX9VM7WEY39QytlBjZiw 



टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां