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मैं प्रेम हूं 



 

✍️प्रेम बजाज 

हां मैं प्रेम हूं ,

संसार की हर सुन्दर

शय में हूं मैं , 

सुबह कि उगती 

सूरज की किरणों में हूं मैं ,

चिड़ियों की चहचहाहट

में हूं मैं ,

नदी में बहते पानी में ,

झरनों से गिरती पानी की

रवानी में ,

सागर की लहरों में ,

सांझ के ढलते पहरो में ,

रात की चांदनी में ,

प्यार से निहारते चांद को

चकोर के दिल में हूं मैं ।

महबूबा की आंखों में ,

आशिक की बातों में ,

इश्क की रातों में ,

खनखनाती चूड़ी की

खनक मे ,

महबूब की बाहों में ,

इश्क की राहों में बस मैं ही मैं ।

इश्क का आगाज़ हूं ,

इशक का अंजाम हूं ,

आशिक की पहचान हूं ,

प्यारे से दिल की

धड़कन और जान हूं मैं ।

मां की ममता में ,

बहन के स्नेह में ,

भाई की डांट में ,

पिता के लाड में बस मैं ही मैं ।

दोस्त की दोस्ती में ,

मासूम की हंसी में ,

तुतलाती तोतली जुबां में ,

बुजुर्गो के आशीर्वाद में बस मैं ही मैं ।

आप सब के दिल में ,

हर महफ़िल में ,

हर ख़ुशी में ,

प्यार भरी ज़िन्दगी में ,

किसी के दिए हुए तोहफे में ,

किसी की दुआओं में ,

प्यार से जो ले उन बलाओं में ,

जीवनसाथी के साथ में ,

संग-संग भीगते हुए बरसात में ,

रूठने - मनाने की मनुहार में ,

हर सु बस प्रेम ही प्रेम ,

बस प्रेम ही प्रेम ।

हां मैं प्रेम ही तो हूं ,

जिसके बिना ना चले संसार ,

जिसके बिना ना सुखी

घर- परिवार 

 


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