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गुरु की महिमा



✍️अलका जैन
गुरुजी तुमको मेरा वंदन।
माथ लगाऊँ गुरुरज चंदन।।
नादान सभी तेरे नंदन।
पार लगाओ करते क्रंदन।।

गंगाजल सा गुरू है पावन।
नित दिन लगता जैसे सावन।।
सीख रहे जीवन हितकारी ।
विनीत बने सच्चा उपकारी।।

काम क्रोध हिय के हर लेते।
पावन मनवा कर देते।।
सुप्त गुणों को निखारते हैं।
जीवन नैया सँवारते हैं।।

नाम गुरु का नित्य उच्चारों।
शुद्ध भाव से चरण पखारो।।
गुरु सम कोई और नहीं है।
महिमा बढ़ चढ गुरू रही है।।

राग द्बेष को छोड़ो भाई ।
सच्चे गुरु ने बात बताई ।।
गुरु ने ईश्वर राह दिखाई ।
सत्य मार्ग चल करें भलाई।।

श्रद्धा सुमन चढ़ाओ पावन।
लगता गुरु ज्ञान मनभावन।।
अनुपम ज्ञान ध्यान खिखलाते।
ज्ञान अमृत की धार बहाते।।

पत्थर पक्का पारस होता।
मान जगत में दुर्जन खोता।।
अंतर के पट खोल जगाते।
हर विपदा से हमें बचाते।।

गुरु की महिमा जो लिख पाए।
अलका कलम कहाँ से लाए।।
काम क्रोध में अति खल कामी।
कृपा मुझ पर कर दो स्वामी।।


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