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बहु पराई क्यों



✍️प्रेम बजाज

कहते हैं हर बेटी पिता की लाडली होती है , ज़रूरी नहीं कि हर बेटी पिता की लाडली ही हो , आज के युग में 20वीं सदी में भी बहुत से परिवार है जहां बेटी के स्थान पर बेटे को अहमियत दी जाती है ‌, जहां बहु को भी कोई दर्जा नहीं मिलता , क्योंकि वो पराए घर से आई है । मां- बाप कहते हैं तु यहां मेहमान है तुझे अपने घर जाना है , ससुराल में कहा जाता है पराई है , पराए घर से आइ है तो कौन सा घर है उसका ।

एक लड़की अपना घर-बार, रिश्ते- नाते , अपना सब पसंदीदा सामान, सब अपनी आदतें छोड़ देती है सिर्फ आप के लिए , अपना  तन-मन आप पर न्योछावर करती है , आपके कुल को आगे बढ़ाती है , परिवार में सभी का ख़्याल रखते हुए , हर रिश्ते की अहमियत को समझते हुए , सभी को खुश रखते हुए अपनी खुशियां, अपने इच्छाएं और कभी अपने सपने भी कुर्बान कर देती है , नए माहोल में ढलना , ने लोगों संग तालमेल बैठाना इतना आसान नहीं होता , तो क्या आपका फ़र्ज़ नहीं बनता उसे इज्ज़त दें प्यार दें, थोड़ा सा उसके हिसाब से भी एडजस्ट करें , उसे अपने परिवार का चहेता बनाए । जिस घर में बेटे की इतनी अहमियत है उसी बेटे के वजूद से जुड़ी है वो । बहु को केवल वंशवृद्धि के लिए , घर में काम के लिए या बेटे के तन की भूख मिटाने के लिए नहीं लाया जाता , बहु को जहां बेटी बना कर लाया जाता है , वहां बहु , बहुत ना रह कर परिवार का अभिन्न अंग होती है ।

आज वृद्धाश्रम की बढ़ती संख्या का कारण केवल बहु को मानना ग़लत है ,  क्या हमारी बेटी किसी की बहु नहीं ???  फिर हम ये बहु- दोष क्यों लगाते हैं हर बात में ।

माना कभी बहु की गलती हो सकती है तो कहीं सास - ससुर भी तो गलत हो सकते हैं , ताली कभी एक हाथ से नहीं बजती ।

जब बेटी से गलती होती है तो उसे प्यार से समझाया जाता है , और कभी तो इग्नोर भी करते हैं हम लोग , तो बहु की गलती पर उसे क्यों नहीं समझाया जाता या उसकी गलती को क्यों नहीं इग्नोर किया जाता । 

अगर एक बहु को उसका पुरा अधिकार मिलेगा घर की सदस्यता का , उसे पराया नहीं अपना माना जाए तो क्यों बहु परायापन दिखाएंगी ??)

अगर एक दुसरे के साथ तालमेल बैठा कर चला जाए तो घर स्वर्ग बन जाए । बहु को  बहु नहीं बेटी बना कर के देखो खुशियों से झोली भर जाएगी चहक उठेगा परिवार , अरमानों की कलियां खिल उठेगी , उम्मीदों के सपने साकार होंगे ।

 

*जगाधरी (यमुनानगर) 

 


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