Subscribe Us

अंतर



✍️विनय मोहन खारवन

बिरजू ने साईकल पर पैडल तेजी से मारने चालू कर दिए थे।साहब के यहां शहर में गाड़ी का ड्राइवर था।गर्मी का चिपचिपा पसीने वाला मौसम, सुबह सुबह ही पसीना पानी की तरह बह रहा था। रोजी रोटी के लिए शहर में एक बिजनेसमैन की गाड़ी का ड्राइवर किसी जानकार ने लगवा दिया था। साईकल कोठी के सामने पेड़ के नीचे खड़ी करके कोठी से  चाबी  ले कर जल्दी से गाड़ी पर कपड़ा मारने लगा। कोठी का मालिक अपनी गेयर वाली साईकल लेकर बाहर निकलते हुए बोला कि गाड़ी पानी से साफ कर दे।

मालिक गाड़ी छोड़ कर पेट को कम करने के लिए साईकल चलाने चला गया। बिरजू साईकल चला कर शहर आया ताकि पेट भर सके। मजबूरी दोनों की पेट को लेकर ही थी।एक का बढ़ गया था, दूसरे का कमर को लग गया था।

*जगाधरी, हरियाणा

 


अपने विचार/रचना आप भी हमें मेल कर सकते है- shabdpravah.ujjain@gmail.com पर।


साहित्य, कला, संस्कृति और समाज से जुड़ी लेख/रचनाएँ/समाचार अब नये वेब पोर्टल  शाश्वत सृजन पर देखेhttp://shashwatsrijan.com


यूटूयुब चैनल देखें और सब्सक्राइब करे- https://www.youtube.com/channel/UCpRyX9VM7WEY39QytlBjZiw 

टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां