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देवभूमि भारत



✍️राजेन्द्र यादव

लुटी हुई आजादी के रणधीर दिवानो  का भारत।

तपस्थली पर तपित सदा श्रमशील  किसानों का भारत।

शबनम से शोला उपजाने की क्षमता जिस देश में है,

दुश्मन की छाती चढ़ गर्जे वीर जवानों का भारत।।

 

मातृभूमि हित शूली चूमे चमन दुलारों का भारत।

आजादी के लिए लहू से चुनी दिवारों का भारत।

सत्य अहिंसा के पथ का सर्जक जगकी अगुवाई का,

गंगा यमुना जैसे निर्मल पाक विचारों का भारत।।

 

शुक, लव-कुश, प्रहलाद ध्रुव से गगन तारकों का भारत।

अग्नि नाग त्रिशूल,पृथ्वी दुष्ट मारकों का भारत।

जहां प्रेम की गंगा बहती सबके भाव विचारों में,

हिन्दू, मस्लिम, सिक्ख, ईसाई एक दारकों का भारत।।

 

ग्रीष्म,पावस,शरद,हेमंता,शिशिर,बसंतों का भारत।

विश्लेषक,उपदेशक,चिंतक,साधू ,संतों का भारत।

श्रृजक जहां पर स्वयं अवतरित होता अपने अंशों से,

देवभूमि वह धरा स्वर्ग सी गीता गन्तो का भारत।।

 

*सरैंया नरोसा, जनपद - लखनऊ

 


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