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अपनों की बेरुखी से



*आशु द्विवेदी

अपनों की बेरुखी से तू इतना परेशान ना हो।

कोई देगा साथ तेरा इस बात की तुझे उम्मीद ना हो।

 

यहाँ कब किसी ने किसी का साथ निभाया है।

ये दुनिया है मतलब की यहाँ अपनों ने अपनों को गिराया है।

 

तो क्या हुआ जो आज तुझपे कोई हँसता है। 

देख तुझे तेरा सुनहरा कल बुलाता है ।

 

उठ खड़ा हो तू अभी दूर तक तुझे चलना है। 

गिरा ना पाए तुझको कोई इस काबिल तुझको बना है।

 

जो मिलाए तुझे तेरी मंजिल से उस राह पे तुझको चलना है 

चल आज से तुझे एक नया सफर शुरू करना है 

 


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