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क़लम की ताक़त 



*मोहित सोनी

जान जाओगे,

तलवार-तोप से

अधिक आग उगलती है कलम ,

बात ये मान जाओगे,

जहाँ शर्म और भय से,

आवाज रुक जाती,

सिर झुक जाता है,

जहाँ सिपाही अधिकारी से

शिकायत नहीं करता

निशाना चूक जाता है

जहाँ त्रस्त कर्मचारी 

नौकरी खोने के डर से

मूक हो जाता है,

वहाँ पत्रकार

अपनी क़लम से

सबकी पोल खोलने

का चाबुक चलाता है।

जहाँ

"जिसकी लाठी-उसकी भैंस"

की तर्ज पर,

कमजोर को दबाया जाता है,

सत्ताधीशों से ख़िलाफ़त

पर सर कुचलाया जाता है,

झूठ का खोटा सिक्का,

भरे बाजार चलाया जाता है,

वहाँ

निर्भीक-निडर होकर,

सच 

पत्रकार द्वारा कलम चलाकर

खोद-खोद कर

सबके सामने बाहर

लाया जाता है।

जहाँ माननीय-सम्माननीय

धूर्त बन जनता को उल्लु बनाते है,

जहाँ 

अच्छे-अच्छे सिस्टम से

हार मान,

चुल्लू भर पानी में

डूब मर जाते है।

वहाँ

क़लम के सिपाही

अपना जलवा दिखाते है,

शर्मसार हो जाए 

काली करतूत करने वाले,

झूठा दम्भ भरने वाले,

कुछ ऐसे वो क़लम चलाते है।

इसलिए कहता हूँ मैं

क़लम की ताक़त 

जान जाओगे,

तलवार-तोप से अधिक

आग उगलती है कलम ,

बात ये मान जाओगे।

*कुक्षी

 


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